छोटा जवाब: नाम बदलने के तीन चरण हैं। पहला शपथ पत्र, जो आपके शहर के नोटरी से बनता है। दूसरा दो अख़बारों में सूचना, जिनमें एक हिंदी का होना चाहिए। तीसरा गजट में प्रकाशन, जिसकी फाइल डाक से दिल्ली जाती है और जिसका शुल्क वयस्क के लिए 1,100 रुपये है। पूरे काम में लगभग 25 से 45 दिन लगते हैं। ध्यान रखिए कि यह पूरी फाइल अंग्रेज़ी में बनती है।
यह आख़िरी बात ही सबसे ज़्यादा लोगों को रोकती है, और इसी वजह से यह पन्ना लिखा गया है।
एक नज़र में
| पहला चरण | शपथ पत्र, नोटरी से |
| दूसरा चरण | दो अख़बारों में सूचना |
| तीसरा चरण | गजट में प्रकाशन |
| गजट का दफ़्तर | दिल्ली में, डाक से |
| शुल्क | वयस्क 1,100 रुपये |
| समय | लगभग 25 से 45 दिन |
| फाइल की भाषा | अंग्रेज़ी |
| सबसे ज़रूरी कागज़ | हाईस्कूल की अंकतालिका |
मुख्य बातें
- गजट की फाइल अंग्रेज़ी में जाती है, चाहे आप कहीं भी रहें।
- हाईस्कूल की अंकतालिका ही नाम की सबसे बड़ी गवाही है।
- सुधार और परिवर्तन अलग चीज़ें हैं, और सुधार सस्ता है।
- पहले आधार ठीक कराइए, बाकी सब उसी से मिलाया जाता है।
- प्रदेश में कहीं भी गजट का कोई काउंटर नहीं है।
ज़रूरी कागज़: Quick Facts
| हाईस्कूल अंकतालिका | नाम की गवाही |
| आधार | पहले सही कराइए |
| शपथ पत्र | नोटरी से, स्टाम्प पेपर पर |
| सार्वजनिक सूचना | टाइप की हुई, दो प्रतियाँ |
| दो गवाह | दोनों प्रतियों पर |
| दो अख़बार | पूरे पन्ने, छह प्रतियाँ |
| सीडी | एमएस वर्ड में |
| भारतकोश रसीद | 1,100 रुपये की |
इस पन्ने में क्या है
- भाषा वाली असली दिक्कत
- सुधार और परिवर्तन का फ़र्क़
- तीन चरण, क्रम से
- अंकतालिका सबसे ऊपर क्यों
- काउंटर कहाँ है
- गजट के बाद क्या
- केंद्रीय गजट: पूरी प्रक्रिया और फाइल के प्रारूप
- हम कहाँ सेवा देते हैं
- कुछ शब्द जो बार-बार मिलेंगे
- इससे जुड़े पन्ने
- हमारा दफ़्तर क्यों
- आम सवाल
भाषा वाली असली दिक्कत
इसीलिए आगे हर प्रारूप ज्यों का त्यों अंग्रेज़ी में दिया है, और हर एक के नीचे हिंदी में यह लिखा है कि उसमें क्या भरना है। नकल कीजिए, पर समझकर।
सुधार और परिवर्तन का फ़र्क़
- सुधार का मतलब है कि रिकॉर्ड में आपका नाम वही होना था, किसी ने गलत टाइप कर दिया।
- परिवर्तन का मतलब है कि अब आप सचमुच किसी और नाम से जाने जाते हैं।
- सुधार में अक्सर गजट लगता ही नहीं, केवल अंकतालिका और शपथ पत्र से काम चल जाता है।
- परिवर्तन में प्रकाशन ज़रूरी होता है, यानी अख़बार और गजट दोनों।
- फ़र्क़ लगभग 1,500 रुपये और कई हफ़्तों का है, इसलिए यह सबसे पहले तय कीजिए।
यह फ़र्क़ किस दफ़्तर में कैसे समझाया जाए, यह हमारे सुधार बनाम परिवर्तन पन्ने पर विस्तार से है।
तीन चरण, क्रम से
पहले आधार ठीक कराइए
क्योंकि आगे लगभग हर दफ़्तर आपके कागज़ आधार से मिलाकर देखता है। नाम बदलवाने के लिए केंद्र पर जाना पड़ता है, यह ऑनलाइन नहीं होता।
शपथ पत्र बनवाइए
स्टाम्प पेपर पर, नोटरी से। शहर में कहीं भी बनवा सकते हैं, मुहर हर जगह बराबर मानी जाती है।
दो अख़बारों में सूचना छपवाइए
एक हिंदी का दैनिक और एक अंग्रेज़ी का। पूरे पन्ने की छह प्रतियाँ ख़रीद लीजिए, कतरन काम नहीं आती।
भारतकोश पर 1,100 रुपये जमा कीजिए
ऑनलाइन, और दो रसीदें प्रिंट कर लीजिए।
पूरी फाइल दिल्ली भेजिए
ट्रैकिंग वाले कूरियर से, और घर पर पूरी नकल रख लीजिए।
फिर बाकी कागज़ बदलवाइए
आधार, पैन, बैंक, पासपोर्ट, इसी क्रम में।
हर चरण में कितना समय लगता है, यह हमारे समय वाले पन्ने पर है।
अंकतालिका सबसे ऊपर क्यों
| लोग सोचते हैं | दफ़्तर मानते हैं |
|---|---|
| आधार सबसे बड़ा कागज़ है | अंकतालिका नाम की गवाही है |
| कोई भी पहचान पत्र चलेगा | जो सबसे पुराना हो, वह भारी पड़ता है |
| नया कागज़ ज़्यादा सही है | पुराना कागज़ ज़्यादा भरोसेमंद है |
| माता-पिता का नाम अलग से देना होगा | वह भी अंकतालिका पर है |
अंकतालिका में सुधार का पूरा रास्ता हमारे यूपी बोर्ड सुधार पन्ने पर है।
काउंटर कहाँ है
- केंद्रीय गजट का कोई दफ़्तर उत्तर प्रदेश में नहीं है, न लखनऊ में, न कहीं और।
- पूरी फाइल दिल्ली जाती है, प्रकाशन विभाग, सिविल लाइन, दिल्ली 110054।
- यानी यह डाक का काम है, लाइन में लगने का नहीं।
- दिल्ली से दूर रहने पर कोई नुक़सान नहीं, कूरियर को फ़र्क़ नहीं पड़ता।
- बलिया से भेजी फाइल और गाजियाबाद से भेजी फाइल एक जैसी पढ़ी जाती हैं।
यह सुनकर ज़्यादातर लोगों को राहत मिलती है। कोई सफ़र नहीं, कोई छुट्टी नहीं, बस एक लिफ़ाफ़ा ठीक से बनाना है।
गजट के बाद क्या
पूरा क्रम और हर कागज़ की वजह हमारे क्रम वाले पन्ने पर है।
केंद्रीय गजट: पूरी प्रक्रिया और फाइल के प्रारूप
हमारी मुख्य सेवा: आगे के सारे प्रारूप अंग्रेज़ी में हैं, क्योंकि विभाग को इसी भाषा में जाते हैं। हर एक के नीचे हिंदी में समझाया गया है कि उसमें क्या भरना है।
चरण 1: शपथ पत्र
हिंदी में समझिए: पहली पंक्ति में अपना नाम, पिता का नाम और पूरा पता। बिंदु एक में वह नाम जो अंकतालिका पर छपा है, उसका अनुक्रमांक और बोर्ड का नाम। बिंदु दो में पुराना और नया नाम। बिंदु तीन कहता है कि दोनों नाम एक ही व्यक्ति के हैं। नीचे सत्यापन में शहर और तारीख। नोटरी से मुहर लगवाइए।
चरण 2: सार्वजनिक सूचना, दो प्रतियों में
हिंदी में समझिए: यही कागज़ दो बार टाइप होगा, बिल्कुल एक जैसा। दोनों पर आपके दस्तखत, और दोनों पर दो गवाहों के दस्तखत, पूरा नाम और पता। घर के लोग गवाह बन सकते हैं। दूसरी प्रति पर गवाह के दस्तखत छूट जाना फाइल वापस आने का सबसे आम कारण है।
चरण 3: सीडी और सीडी प्रमाणपत्र
हिंदी में समझिए: सार्वजनिक सूचना का वही मजमून एक सीडी में एमएस वर्ड फाइल के रूप में जाता है। कागज़ पर आख़िरी वक़्त कोई सुधार किया और सीडी में नहीं किया, तो फाइल वापस आ जाती है। दोनों एक जैसे होने चाहिए।
चरण 4: अख़बार, शुल्क, पत्र और भेजना
दो अख़बारों में सूचना छपवाइए
अपने जिले का एक हिंदी दैनिक और एक अंग्रेज़ी अख़बार। हर एक के पूरे पन्ने की छह प्रतियाँ ख़रीदिए, कतरन नहीं।
भारतकोश पर 1,100 रुपये जमा कीजिए
वयस्क के लिए 1,100 और नाबालिग के लिए 1,700 रुपये। दो रसीदें प्रिंट कर लीजिए।
पत्र लिखिए
The Controller, Publication Department, Civil Line, Delhi 110054 के नाम, जिसमें अपना मोबाइल नंबर और ईमेल ज़रूर दीजिए।
फाइल जमा कीजिए और नकल रखिए
हर कागज़ की एक पूरी नकल घर पर, क्योंकि यही आपके पास बचेगी।
ट्रैकिंग वाले कूरियर से भेजिए
प्रदेश के ज़्यादातर जिलों से दिल्ली एक से तीन दिन।
फिर इंतज़ार कीजिए, फ़ोन मत कीजिए
प्रकाशन ऑनलाइन खोजकर देख लीजिए, यही सबसे तेज़ तरीका है।
दस्तखत करने से पहले पढ़िए
अगर हिंदी और अंग्रेज़ी में आपके नाम की वर्तनी अलग-अलग जगह अलग है, तो वह अपने आप में एक आम मामला है, जो हमारे लिप्यंतरण वाले पन्ने पर समझाया गया है।
शुल्क, समय और फाइल
| वयस्क गजट शुल्क | 1,100 रुपये |
| नाबालिग गजट शुल्क | 1,700 रुपये |
| अख़बार | हर अख़बार के कुछ सौ रुपये |
| शपथ पत्र | स्टाम्प और नोटरी मिलाकर 100 से 500 रुपये |
| कूरियर | दो सौ रुपये के आसपास |
| समय | लगभग 25 से 45 दिन |
| हमारी सेवा | बेसिक 999 रुपये से, कम्पलीट 1,999 रुपये से, अलग से |
लिफ़ाफ़े में यह सब जाता है: मोबाइल और ईमेल सहित पत्र, नोटरी किया शपथ पत्र, दो प्रतियों में टाइप की सार्वजनिक सूचना जिन पर दो-दो गवाह हों, एमएस वर्ड की सीडी और उसका प्रमाणपत्र, दोनों अख़बारों के पूरे पन्ने, पहचान पत्र, पते का प्रमाण, फोटो और भारतकोश की रसीद।
शुरू करने से पहले जाँच लीजिए
- यह सुधार है या परिवर्तन, यह तय हुआ?
- हाईस्कूल की अंकतालिका मिल गई, और उस पर नाम सही है?
- आधार ठीक है, या सबसे पहले वही कराना है?
- दोनों गवाहों ने दोनों प्रतियों पर दस्तखत किए?
गजट के बाद कौन सा कागज़
पहले आधार, फिर पैन, फिर बैंक, और फिर जो आपकी अपनी ज़रूरत हो। गजट, दोनों अख़बार के पन्ने और शपथ पत्र एक साथ हमेशा के लिए संभालकर रखिए, क्योंकि ये तीनों आगे कई साल तक माँगे जाते हैं।
जो दूसरी वेबसाइटें गलत बताती हैं
- गलत: हर मामले में गजट लगता है। सही: सिर्फ़ वर्तनी सुधार में अक्सर नहीं लगता।
- गलत: गजट का दफ़्तर लखनऊ में है। सही: प्रदेश में कहीं नहीं है, फाइल दिल्ली जाती है।
- गलत: अख़बार की कतरन काफ़ी है। सही: पूरा पन्ना चाहिए, नाम और तारीख दिखती हुई।
- गलत: एक प्रति ही बहुत है। सही: सार्वजनिक सूचना की दो प्रतियाँ, दोनों पर दो गवाह।
- गलत: गजट एक हफ़्ते में हो जाता है। सही: प्रकाशन में 25 से 45 दिन लगते हैं, और कोई इसे छोटा नहीं कर सकता।
हम कहाँ सेवा देते हैं
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में। सबसे ज़्यादा इन जगहों से काम आता है:
| मध्य | लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, हरदोई, सीतापुर, रायबरेली, बाराबंकी |
| पश्चिम | नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, आगरा, अलीगढ़, मथुरा, मुरादाबाद, सहारनपुर |
| पूर्व | वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, आजमगढ़, जौनपुर, बलिया, देवरिया, गाज़ीपुर |
| बुंदेलखंड | झाँसी, बाँदा, महोबा, हमीरपुर, चित्रकूट, जालौन |
| रुहेलखंड | बरेली, शाहजहाँपुर, पीलीभीत, बदायूँ, रामपुर, बिजनौर, अमरोहा |
आपका जिला सिर्फ़ दो बातें तय करता है: किन अख़बारों में सूचना छपेगी, और कौन सा स्थानीय दफ़्तर आपका रिकॉर्ड रखता है। गजट सब जगह से एक जैसा है। हमारा चैंबर Chamber No. 19, Sadar Tehsil, Sector 5, Gomti Nagar Vistar, Lucknow 226010 में है। फ़ोन 9540003316 या व्हाट्सएप 9540005002, किसी भी जिले से।
कुछ शब्द जो बार-बार मिलेंगे
- शपथ पत्र
- स्टाम्प पेपर पर लिखा और नोटरी से प्रमाणित बयान, जिसमें आप शपथ लेकर कहते हैं कि दोनों नाम एक ही व्यक्ति के हैं।
- सार्वजनिक सूचना
- गजट फाइल में जाने वाला टाइप किया हुआ कागज़, दो एक जैसी प्रतियों में, हर एक पर दो गवाहों के दस्तखत।
- गजट
- भारत सरकार का सरकारी पत्र, जिसमें नाम परिवर्तन की अधिसूचना छपती है और जो स्थायी सार्वजनिक रिकॉर्ड बन जाती है।
- प्रकाशन विभाग
- दिल्ली का वह दफ़्तर जहाँ केंद्रीय गजट की सारी फाइलें जाती हैं, सिविल लाइन, दिल्ली 110054।
- भारतकोश
- सरकारी शुल्क ऑनलाइन जमा करने का पोर्टल, जहाँ गजट का 1,100 रुपये शुल्क भरा जाता है।
- नाम सुधार
- जब रिकॉर्ड में नाम वही होना था पर गलत टाइप हो गया, जिसमें अक्सर गजट की ज़रूरत नहीं पड़ती।
इससे जुड़े पन्ने
आगे जिस भी दफ़्तर जाना हो, उसके लिए यहाँ एक पन्ना है। ये अंग्रेज़ी में हैं:
- the full process in English: यही पन्ना, अंग्रेज़ी में।
- गजट की पूरी जानकारी: प्रकाशन का हर चरण।
- शपथ पत्र: स्टाम्प पेपर, नोटरी और प्रारूप।
- अख़बार में सूचना: कौन से अख़बार और कितनी प्रतियाँ।
- कौन से कागज़ चाहिए: पाँच चीज़ें जो हर दफ़्तर माँगता है।
- कुल कितना खर्च: हर चरण का अलग हिसाब।
- आधार में नाम बदलना: सबसे पहला काम।
- शादी के बाद नाम: पूरा क्रम एक जगह।
- जब काम अटक जाए: तब क्या करना है।
- चालीस सवालों के जवाब: असर के हिसाब से क्रम में।
- दफ़्तर से संपर्क: फ़ोन और व्हाट्सएप।
- शादी के बाद नाम: कानून क्या नहीं कहता, और आधा बदलना महँगा क्यों है।
- गजट में नाम परिवर्तन: दो गजट हैं, और पास वाला हर जगह नहीं चलता।
- यूपी बोर्ड मार्कशीट में नाम सुधार: रास्ता स्कूल से जाता है, और गजट यहाँ नहीं चलता।
- आधार में नाम बदलना: मौके गिने-चुने हैं, इसलिए एक ही बार में सही कराइए।
- जन्म प्रमाण पत्र में नाम सुधार: रिकॉर्ड वहीं है जहाँ जन्म हुआ, और जोड़ना सुधारने से अलग है।
- पिता के नाम में सुधार: यह नाम आपका नहीं है, इसलिए सबूत भी आपका नहीं चलेगा।
- नाम बदलने का खर्च: सरकारी शुल्क और सेवा शुल्क अलग-अलग हैं।
- लखनऊ में नाम परिवर्तन: राजधानी होने से हर काम यहाँ नहीं होता।
- शपथ पत्र प्रारूप: नोटरी मजमून नहीं पढ़ता, इसलिए आप पढ़िए।
हम प्रारूप हिंदी में समझाकर क्यों देते हैं
बहुत से लोग हमारे पास तब आते हैं जब गजट में उनका नाम गलत छप चुका होता है। पूछने पर पता चलता है कि किसी ने अंग्रेज़ी में टाइप कर दिया था और उन्होंने पढ़े बिना दस्तखत कर दिए। यह उनकी गलती नहीं है। कागज़ उस भाषा में था जिसमें वे रोज़ काम नहीं करते। इसलिए हम हर प्रारूप के साथ हिंदी में यह लिखकर देते हैं कि उसमें क्या भरा जा रहा है, और दस्तखत से पहले एक बार मिलाने को कहते हैं। विपिन चौहान, बी.टेक एलएलबी, यही तरीका पाँच साल से चला रहे हैं।
- हर प्रारूप हिंदी में समझाते हैं: ताकि आप पढ़कर दस्तखत करें।
- दस्तखत से पहले नाम मिलवाते हैं: अक्षर दर अक्षर।
- पहले यह देखते हैं कि गजट चाहिए भी या नहीं: कई बार नहीं चाहिए।
- पूरे प्रदेश से कागज़ कूरियर और फोटो से लेते हैं: किसी को आना नहीं पड़ता।
Associate office at Chamber No. 19, Sadar Tehsil, Sector 5, Gomti Nagar Vistar, Lucknow 226010, serving all 75 districts of Uttar Pradesh, Monday to Saturday, 10 AM to 6:30 PM. फ़ोन 9540003316 या व्हाट्सएप 9540005002।
दोनों नाम हिंदी में भेज दीजिए
Uttar Pradesh Name Change
Associate Office: Chamber No. 19, Sadar Tehsil, Sector 5, Gomti Nagar Vistar, Lucknow, Uttar Pradesh 226010
Head Office: Metro Pillar 337, Hardev Nagar, Street 1, Shop No 1 (Shri Sham Documentation)
फ़ोन: 9540003316
व्हाट्सएप: 9540005002
ईमेल: info@uttarpradeshnamechange.com
समय: सोमवार से शनिवार, सुबह 10 से शाम 6:30 बजे
पुराना और नया नाम हिंदी में लिखकर भेज दीजिए, और अंकतालिका की फोटो। हम अंग्रेज़ी का प्रारूप तैयार करके वापस भेज देंगे।
कॉल और नाम परिवर्तन प्रारूप पाइए
फ़ॉर्म खुल रहा है...
आम सवाल
क्या गजट की फाइल हिंदी में दे सकते हैं?
प्रारूप अंग्रेज़ी में ही बनते हैं। इसीलिए यहाँ हर प्रारूप के नीचे हिंदी में समझाया गया है कि उसमें क्या भरना है।
क्या हर मामले में गजट ज़रूरी है?
नहीं। अगर सिर्फ़ वर्तनी गलत टाइप हुई है तो अक्सर गजट की ज़रूरत नहीं पड़ती, और यही लगभग 1,500 रुपये तथा कई हफ़्ते बचाता है।
गजट का दफ़्तर उत्तर प्रदेश में कहाँ है?
कहीं नहीं। पूरी फाइल डाक से प्रकाशन विभाग, सिविल लाइन, दिल्ली जाती है।
दिल्ली से दूर रहने पर देर होगी?
नहीं। फाइलें क्रम से देखी जाती हैं, और कूरियर को दूरी से फ़र्क़ नहीं पड़ता।
कितना समय लगता है?
लगभग 25 से 45 दिन, और इसे कोई छोटा नहीं कर सकता।
कौन सा कागज़ सबसे ज़रूरी है?
हाईस्कूल की अंकतालिका, क्योंकि वह उस समय की है जब आपके नाम पर और कोई सरकारी कागज़ बना ही नहीं था।
अंकतालिका में ही नाम गलत है तो?
तो पहले उसे ठीक कराइए, क्योंकि आगे हर जगह उसी का हवाला दिया जाता है।
अख़बार की कतरन चलेगी?
नहीं। पूरे पन्ने चाहिए, जिन पर अख़बार का नाम और तारीख दिखती हो।
गवाह कौन बन सकता है?
घर के लोग भी बन सकते हैं। हर गवाह के दस्तखत, पूरा नाम और पता चाहिए, और दोनों प्रतियों पर।
सबसे ज़्यादा फाइलें किस वजह से वापस आती हैं?
दूसरी प्रति पर गवाह के दस्तखत छूट जाना, और सीडी का मजमून कागज़ से न मिलना।
पहले कौन सा कागज़ बदलवाएँ?
आधार, क्योंकि आगे लगभग हर दफ़्तर बाकी कागज़ उसी से मिलाकर देखता है।
क्या मुझे लखनऊ आना पड़ेगा?
नहीं। कागज़ कूरियर से या फोटो खींचकर भेजे जा सकते हैं।
आधिकारिक स्रोत
- प्रकाशन विभाग, सिविल लाइन, दिल्ली 110054, केंद्रीय गजट अधिसूचना के लिए।
- ई-गजट पोर्टल egazette.gov.in, जहाँ प्रकाशित अधिसूचना खोजी जा सकती है।
- भारतकोश, निर्धारित शुल्क जमा करने के लिए।
- उत्तर प्रदेश में शपथ पत्र और स्टाम्प से जुड़ी नोटरी व्यवस्था।
यहाँ दी गई बातें इन स्रोतों और हमारे अपने काम से जाँची गई हैं। शुल्क, प्रारूप और समय बदलते रहते हैं, इसलिए फाइल भेजने से पहले मौजूदा नियम देख लीजिए।
संक्षेप में
नाम बदलने की प्रक्रिया अपने आप में सीधी है। शपथ पत्र, दो अख़बारों में सूचना, और गजट में प्रकाशन। शुल्क वयस्क के लिए 1,100 रुपये और समय लगभग 25 से 45 दिन। उलझन प्रक्रिया में नहीं, भाषा में है। आपका पूरा काम हिंदी में चलता है, नोटरी से बात, अख़बार का हिंदी संस्करण, तहसील में बातचीत, लेकिन गजट की फाइल में जो जाता है वह अंग्रेज़ी में होता है। नतीजा यह होता है कि लोग किसी से टाइप करवा लेते हैं और यह समझे बिना दस्तखत कर देते हैं कि उसमें लिखा क्या है, और अगर उसमें गलती रह गई तो वह छपकर सरकारी रिकॉर्ड बन जाती है। इसलिए हर प्रारूप यहाँ ज्यों का त्यों दिया है और हर एक के नीचे हिंदी में समझाया है कि उसमें क्या भरना है। दस्तखत करने से पहले चार चीज़ें मिला लीजिए: पुराना नाम, नया नाम, पिता का नाम और पता। पढ़ने में दो मिनट लगते हैं, सुधरवाने में दो महीने।
