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फ़ैसला आपका है।

शादी के बाद नाम कैसे बदलें, उत्तर प्रदेश में

शादी हो गई है और अब कागज़ों का सवाल है। सबसे पहले वह बात, जो बहुत कम बताई जाती है: कोई कानून यह नहीं कहता कि शादी के बाद आपको नाम बदलना पड़ेगा। न बदलने पर कोई दिक्कत नहीं आती, बल्कि कागज़ी काम कम रहता है। यह पन्ना आपको कुछ करने को नहीं कहता। यह सिर्फ़ दोनों रास्ते साफ़ रखता है, ताकि फ़ैसला जानकारी के साथ हो।

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कानूनन ज़रूरी नहीं आधा बदलना सबसे महँगा कागज़ दो जिलों में क्रम से करना है

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छोटा जवाब: नाम बदलना कानूनन ज़रूरी नहीं है। अगर बदलना है, तो पहले विवाह पंजीकरण कराइए, फिर आधार, फिर पैन, फिर बैंक, और उसके बाद बाकी सब। अगर नाम सचमुच बदल रहा है तो गजट भी लगेगा। और सबसे ज़रूरी बात: या तो सब बदलिए, या कुछ मत बदलिए। आधे कागज़ पुराने नाम में और आधे नए में, यही असली मुसीबत है।

यह पन्ना आपको यह नहीं बताएगा कि क्या करना चाहिए। वह आपका फ़ैसला है। यह सिर्फ़ यह बताएगा कि हर रास्ते में आगे क्या होता है।

शादी के बाद नाम कैसे बदलें, उत्तर प्रदेश
या तो सब बदलिए, या कुछ मत बदलिए। बीच का रास्ता महँगा है।

एक नज़र में

क्या नाम बदलना ज़रूरी हैनहीं, कोई कानून नहीं कहता
अगर नहीं बदलेंगीकागज़ी काम कम, कोई दिक्कत नहीं
अगर बदलेंगीपूरा बदलिए, आधा नहीं
सबसे पहलेविवाह पंजीकरण
फिरआधार, पैन, बैंक
गजट कबजब नाम सचमुच बदल रहा हो
आम मुश्किलकागज़ दो जिलों में बँटे होना
कोई समय सीमानहीं है, जल्दबाज़ी की ज़रूरत नहीं

मुख्य बातें

ज़रूरी कागज़: Quick Facts

विवाह प्रमाण पत्रसबसे मुख्य कागज़
हाईस्कूल अंकतालिकामायके के नाम की गवाही
दोनों के आधारआपका और पति का
शादी की तस्वीरेंपंजीकरण के लिए
दो गवाहपंजीकरण के लिए
वर्तमान पते का प्रमाणससुराल का
गजटअगर नाम सचमुच बदल रहा है
कई फोटोकॉपीहर दफ़्तर एक रखता है

इस पन्ने में क्या है

  1. क्या नाम बदलना ज़रूरी है
  2. आधा बदलना सबसे महँगा क्यों
  3. कागज़ दो जिलों में
  4. करने का क्रम
  5. विवाह पंजीकरण
  6. जो पीछे छूट जाता है
  7. केंद्रीय गजट: पूरी प्रक्रिया और फाइल के प्रारूप
  8. हम कहाँ सेवा देते हैं
  9. कुछ शब्द जो बार-बार मिलेंगे
  10. इससे जुड़े पन्ने
  11. हमारा दफ़्तर क्यों
  12. आम सवाल

क्या नाम बदलना ज़रूरी है

सीधा जवाब: नहीं। भारत में कोई कानून यह नहीं कहता कि शादी के बाद औरत को अपना नाम या सरनेम बदलना पड़ेगा। कोई दफ़्तर आपको मजबूर नहीं करेगा कोई कागज़ इसी वजह से रुकता नहीं कोई समय सीमा भी नहीं है अगर आप नाम नहीं बदलतीं, तो असल में कागज़ी काम कम रहता है। आपके सारे दस्तावेज़ पहले से एक जैसे हैं, और वैसे ही रहेंगे। अगर आप बदलना चाहती हैं, तो वह भी बिल्कुल ठीक है और लाखों लोग करते हैं। बात सिर्फ़ इतनी है कि यह आपका फ़ैसला है, कानून का आदेश नहीं।

यह बात इसलिए ऊपर लिखी है क्योंकि बहुत सी महिलाओं को बताया जाता है कि यह अनिवार्य है, और उसी वजह से वे जल्दबाज़ी में काम शुरू कर देती हैं।

आधा बदलना सबसे महँगा क्यों

तीन हालतआगे क्या होता है
कुछ नहीं बदलासब कागज़ एक जैसे, कोई दिक्कत नहीं
सब बदल दियासब कागज़ एक जैसे, कोई दिक्कत नहीं
आधा बदलाहर काउंटर पर सवाल, सालों तक
असली गड़बड़ यही है: कुछ कागज़ मायके के नाम में कुछ कागज़ ससुराल के नाम में और दोनों को जोड़ने वाला कुछ नहीं ऐसा तब होता है जब कोई आधार बदलवा लेती है पर पैन नहीं, या बैंक बदलवा लेती है पर मार्कशीट का हवाला नहीं देती। फिर हर नए दफ़्तर में यही सवाल आता है कि ये दोनों नाम एक ही व्यक्ति के कैसे हैं। इसलिए असली सवाल यह नहीं है कि नाम बदलूँ या नहीं। असली सवाल यह है: सब बदलूँगी, या कुछ नहीं? दोनों ठीक हैं। बीच का रास्ता ठीक नहीं है।

अगर आपके कागज़ पहले से आधे-आधे हो चुके हैं, तो घबराइए नहीं। एक शपथ पत्र दोनों नामों को जोड़ देता है, जैसा हमारे दो नाम वाले पन्ने पर बताया गया है।

कागज़ दो जिलों में

एक शक्ल जो लगभग हर शादी के बाद बनती है: जन्म और पढ़ाई सीतापुर जन्म प्रमाण पत्र सीतापुर नगर पालिका अंकतालिका वहीं का बोर्ड राशन कार्ड माता-पिता का, वहीं शादी लखनऊ में अब रहती हैं लखनऊ विवाह प्रमाण पत्र यहाँ का आधार का पता अभी भी पुराना कुछ भी गलत नहीं है। हर कागज़ अपने समय के हिसाब से सही है। पर अब आपकी पहचान दो जिलों में बँटी है, और हर दफ़्तर को सिर्फ़ अपना आधा हिस्सा दिखता है। शादी के बाद असली काम यही है। नाम नहीं, इन दोनों हिस्सों को मिलाना।

कौन सा कागज़ किस जिले में बनता है और कहाँ सुधरता है, यह हमारे जिलों वाले पन्ने पर है।

करने का क्रम

  1. विवाह पंजीकरण कराइए

    अपनी तहसील के उप निबंधक कार्यालय में। दो-तीन प्रमाणित प्रतियाँ एक साथ ले लीजिए, अलग-अलग दफ़्तरों के लिए काम आएँगी।

  2. अगर नाम सचमुच बदल रहा है तो प्रकाशन कराइए

    शपथ पत्र, दो अख़बार और गजट। इसमें 25 से 45 दिन लगते हैं, इसलिए जल्दी शुरू कीजिए।

  3. आधार बदलवाइए

    नाम और पता एक साथ, सेवा केंद्र जाकर। आगे लगभग हर दफ़्तर इसी से मिलाकर देखता है।

  4. पैन बदलवाइए

    जो आधार से मिलाया जाता है और पैसे से जुड़ी हर चीज़ की जड़ है।

  5. बैंक और उससे जुड़े खाते

    बीमा, डीमैट और म्यूचुअल फंड भी इसी के साथ।

  6. फिर पासपोर्ट और बाकी

    पासपोर्ट का समय तभी लीजिए जब गजट हाथ में आ जाए, पहले नहीं।

हर कदम पीछे वाले से मिलाया जाता है, इसीलिए क्रम मायने रखता है। पूरा तर्क हमारे क्रम वाले पन्ने पर है।

विवाह पंजीकरण

पंजीकरण में क्या-क्या लगता है और अकेला प्रमाण पत्र कब काफ़ी होता है, यह हमारे विवाह प्रमाण पत्र पन्ने पर है।

जो पीछे छूट जाता है

शादी के बाद जो चीज़ें सबसे ज़्यादा भुला दी जाती हैं: माता-पिता के राशन कार्ड में आपका नाम वहाँ से हटना है, यहाँ जुड़ना है माता-पिता की बीमा पॉलिसी में आपका नाम नामांकित के तौर पर, अब भी मायके का नाम लिखा है मायके के पुराने बैंक खाते जो चलते नहीं, पर बंद भी नहीं हुए कॉलेज और स्कूल के रिकॉर्ड जो नौकरी की जाँच में सालों बाद माँगे जाते हैं वोटर सूची जिसमें नया नाम जोड़ना नहीं, पुरानी जगह से हटाकर लाना होता है दूसरी पंक्ति सबसे ज़्यादा भुलाई जाती है और सबसे चुपचाप नुक़सान करती है। क्योंकि वह कागज़ आपका नहीं, आपके माता-पिता का है, और उसे कोई नहीं देखता।

राशन कार्ड वाला हिस्सा हमारे राशन कार्ड पन्ने पर है और नामांकित वाला हमारे नामांकित पन्ने पर।

केंद्रीय गजट: पूरी प्रक्रिया और फाइल के प्रारूप

हमारी मुख्य सेवा: प्रारूप अंग्रेज़ी में बनते हैं, क्योंकि विभाग को इसी भाषा में जाते हैं। हर एक के नीचे हिंदी में समझाया गया है।

चरण 1: शपथ पत्र

AFFIDAVIT (on non-judicial stamp paper, notarised) I, ____________________ W/O ____________________ , R/o ____________________________________________________ , District ____________________ , Uttar Pradesh, do hereby solemnly affirm and declare as under:- 1- That my maiden name was ____________________ , as recorded in my High School marksheet, Roll No. ____________________ . 2- That I was married to ____________________ on __-__-____ , and the said marriage is registered vide Certificate No. ____________________ . 3- That I have changed my name to ____________________ and I shall hereafter be known as ____________________ for all purposes. 4- That both the said names are the name of one and the same person, that is, myself. 5- That it is my true and correct statement. DEPONENT VERIFICATION:- Verified at ____________ on this __-__-20__ that the contents of the above Affidavit are true and correct to the best of my knowledge and belief. DEPONENT

हिंदी में समझिए: पहली पंक्ति में अपना नाम और पति का नाम, फिर पूरा पता और जिला। बिंदु एक में मायके का नाम, जैसा अंकतालिका पर छपा है, उसके अनुक्रमांक के साथ। बिंदु दो में पति का नाम, शादी की तारीख और विवाह प्रमाण पत्र की संख्या। बिंदु तीन में नया नाम। ये दो बिंदु मिलकर पूरी कहानी बता देते हैं, इसलिए काउंटर पर कुछ पूछना नहीं पड़ता।

चरण 2: सार्वजनिक सूचना, दो प्रतियों में

PUBLIC NOTICE (TWO identical typed copies, each signed and witnessed) It is for general information that I, ____________________ W/O ____________________ , R/o ______________________________ ____________________________________ , declare that I have changed my name from ____________________ to ____________________ and I shall hereafter be known as ____________________ for all purposes. It is certified that I have complied with other legal requirements in this connection. ____________________ Signature of Applicant WITNESS NO. 1 Signature :- ____________________ Full Name :- ____________________ Address :- ____________________ WITNESS NO. 2 Signature :- ____________________ Full Name :- ____________________ Address :- ____________________

हिंदी में समझिए: यह कागज़ दो बार टाइप होगा, बिल्कुल एक जैसा, और दोनों पर दो गवाहों के दस्तखत, पूरा नाम और पता चाहिए। मायके या ससुराल, किसी भी तरफ़ के लोग गवाह बन सकते हैं।

चरण 3: सीडी और सीडी प्रमाणपत्र

CD-CERTIFICATE I, ____________________ W/O ____________________ , R/o ____________________________________________________ , do hereby declare:- 1- That the matter in CD and hard copy is the same and I am responsible for any mismatch. 2- That I am responsible for the quality of CD. 3- That the CD is in MS-Word Format. 4- That the above statement is true and correct. Signature of Applicant ____________________ R/o ____________________

हिंदी में समझिए: सार्वजनिक सूचना का वही मजमून एक सीडी में एमएस वर्ड फाइल के रूप में जाता है। कागज़ और सीडी में एक भी अक्षर का फ़र्क़ हुआ तो फाइल वापस आ जाती है।

चरण 4: अख़बार, शुल्क, पत्र और भेजना

  1. दो अख़बारों में सूचना छपवाइए

    अपने जिले का एक हिंदी दैनिक और एक अंग्रेज़ी अख़बार, पूरे पन्ने की छह प्रतियाँ।

  2. भारतकोश पर 1,100 रुपये जमा कीजिए

    ऑनलाइन, और दो रसीदें प्रिंट कर लीजिए।

  3. पत्र लिखिए

    The Controller, Publication Department, Civil Line, Delhi 110054 के नाम, अपना मोबाइल और ईमेल देकर।

  4. पूरी फाइल की नकल घर पर रखिए

    हर कागज़ की, क्योंकि यही आपके पास बचेगी।

  5. ट्रैकिंग वाले कूरियर से भेजिए

    प्रदेश के ज़्यादातर जिलों से दिल्ली एक से तीन दिन।

  6. फिर आधार, फिर बाकी

    प्रकाशन हाथ में आने के बाद ही।

सूची बनाइए, फिर शुरू कीजिए

एक बार बैठकर वह सब लिख लीजिए जिस पर आपका नाम है: [ ] आधार [ ] पैन [ ] सारे बैंक खाते [ ] पासपोर्ट [ ] ड्राइविंग लाइसेंस [ ] वोटर सूची [ ] राशन कार्ड, दोनों घरों के [ ] बीमा पॉलिसी [ ] डीमैट और म्यूचुअल फंड [ ] नौकरी और भविष्य निधि [ ] मायके के स्कूल-कॉलेज रिकॉर्ड [ ] ज़मीन के कागज़, अगर हों [ ] माता-पिता की पॉलिसी में आपका नाम आख़िरी पंक्ति कोई नहीं लिखता, और वही सबसे चुपचाप ज़रूरी है। फिर ऊपर बताए क्रम से एक-एक करके काटती जाइए। महीनों लगेंगे, यह सामान्य है। जो ठीक नहीं है वह यह है कि सूची बने ही न।

यह सूची छापकर रख लीजिए। अधूरी सूची भी अच्छी याददाश्त से बेहतर होती है।

शुल्क, समय और फाइल

विवाह पंजीकरणनिर्धारित राज्य शुल्क
शपथ पत्रस्टाम्प और नोटरी मिलाकर 100 से 500 रुपये
अख़बारहर अख़बार के कुछ सौ रुपये
वयस्क गजट शुल्क1,100 रुपये
आधार अपडेटनिर्धारित मामूली शुल्क
समयगजट में लगभग 25 से 45 दिन
हमारी सेवाबेसिक 999 रुपये से, कम्पलीट 1,999 रुपये से, अलग से

लिफ़ाफ़े में यह सब जाता है: मोबाइल और ईमेल सहित पत्र, नोटरी किया शपथ पत्र, दो प्रतियों में टाइप की सार्वजनिक सूचना जिन पर दो-दो गवाह हों, एमएस वर्ड की सीडी और उसका प्रमाणपत्र, दोनों अख़बारों के पूरे पन्ने, पहचान पत्र, पते का प्रमाण, फोटो और भारतकोश की रसीद।

शुरू करने से पहले जाँच लीजिए

गजट के बाद कौन सा कागज़

पहले आधार, नए पते के साथ, फिर पैन, फिर बैंक। विवाह प्रमाण पत्र, गजट और शपथ पत्र तीनों हमेशा एक साथ संभालकर रखिए, क्योंकि यही तिकड़ी आगे सालों तक हर सवाल का जवाब है।

जो दूसरी वेबसाइटें गलत बताती हैं

हम कहाँ सेवा देते हैं

उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में। शादी के बाद अक्सर दो जिले जुड़े होते हैं, मायके का और ससुराल का, और हम दोनों तरफ़ का काम एक साथ देखते हैं:

मध्यलखनऊ, कानपुर, उन्नाव, हरदोई, सीतापुर, रायबरेली, बाराबंकी
पश्चिमनोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, आगरा, अलीगढ़, मथुरा, मुरादाबाद, सहारनपुर
पूर्ववाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, आजमगढ़, जौनपुर, बलिया, देवरिया, गाज़ीपुर
बुंदेलखंडझाँसी, बाँदा, महोबा, हमीरपुर, चित्रकूट, जालौन
रुहेलखंडबरेली, शाहजहाँपुर, पीलीभीत, बदायूँ, रामपुर, बिजनौर, अमरोहा

किसी को आने की ज़रूरत नहीं पड़ती। कागज़ की फोटो व्हाट्सएप पर भेज दीजिए, बाकी हम देख लेंगे। हमारा चैंबर Chamber No. 19, Sadar Tehsil, Sector 5, Gomti Nagar Vistar, Lucknow 226010 में है। फ़ोन 9540003316 या व्हाट्सएप 9540005002

कुछ शब्द जो बार-बार मिलेंगे

विवाह पंजीकरण
उप निबंधक कार्यालय में शादी दर्ज कराना, जिसके बाद प्रमाण पत्र मिलता है।
शपथ पत्र
स्टाम्प पेपर पर नोटरी से प्रमाणित बयान, जिसमें आप शपथ लेकर कहती हैं कि दोनों नाम एक ही व्यक्ति के हैं।
सार्वजनिक सूचना
गजट फाइल में जाने वाला टाइप किया कागज़, दो एक जैसी प्रतियों में, हर एक पर दो गवाह।
नामांकित
बीमा या खाते में वह व्यक्ति जिसे बाद में रकम मिलनी है। माता-पिता की पॉलिसी में अक्सर आपका मायके वाला नाम लिखा रहता है।
गजट
भारत सरकार का सरकारी पत्र, जिसमें नाम परिवर्तन छपने पर वह स्थायी सार्वजनिक रिकॉर्ड बन जाता है।
भारतकोश
सरकारी शुल्क ऑनलाइन जमा करने का पोर्टल, जहाँ गजट का 1,100 रुपये शुल्क भरा जाता है।

आगे जिस भी दफ़्तर जाना हो, उसके लिए यहाँ एक पन्ना है:

हम पहले यह क्यों पूछते हैं कि मायका कहाँ है

नई शादीशुदा ग्राहक से हमारा पहला सवाल यह नहीं होता कि नया नाम क्या है। हम पूछते हैं कि आप कहाँ पली-बढ़ीं और अभी कहाँ रहती हैं, क्योंकि इन्हीं दो जवाबों से पता चलता है कि आपके कागज़ कितनी दूर-दूर बँटे हैं और किस क्रम से काम करना है। और अगर कोई कहती है कि उससे नाम बदलवाने को कहा जा रहा है, तो हम यह भी साफ़ बता देते हैं कि कानून यह नहीं कहता। उसके बाद फ़ैसला उसी का है। विपिन चौहान, बी.टेक एलएलबी, नक्शे से शुरू करते हैं, नाम से नहीं।

Associate office at Chamber No. 19, Sadar Tehsil, Sector 5, Gomti Nagar Vistar, Lucknow 226010, serving all 75 districts of Uttar Pradesh, Monday to Saturday, 10 AM to 6:30 PM. फ़ोन 9540003316 या व्हाट्सएप 9540005002

दोनों जिले बता दीजिए

Uttar Pradesh Name Change

Associate Office: Chamber No. 19, Sadar Tehsil, Sector 5, Gomti Nagar Vistar, Lucknow, Uttar Pradesh 226010

Head Office: Metro Pillar 337, Hardev Nagar, Street 1, Shop No 1 (Shri Sham Documentation)

फ़ोन: 9540003316

व्हाट्सएप: 9540005002

ईमेल: info@uttarpradeshnamechange.com

समय: सोमवार से शनिवार, सुबह 10 से शाम 6:30 बजे

बता दीजिए कि मायका किस जिले में है, अभी कहाँ रहती हैं, और शादी दर्ज हुई या नहीं। इतने से पूरा क्रम बन जाता है।

कॉल और नाम परिवर्तन प्रारूप पाइए

फ़ॉर्म खुल रहा है...

बेकार कॉल नहींसरकारी शुल्क और हमारी फ़ीस अलग-अलग

आम सवाल

क्या शादी के बाद नाम बदलना ज़रूरी है?

नहीं। भारत में कोई कानून यह नहीं कहता। न बदलने पर कागज़ी काम कम रहता है और कोई दफ़्तर आपको मजबूर नहीं करेगा।

तो लोग बदलते क्यों हैं?

अपनी मर्ज़ी या परिवार की परंपरा से। दोनों रास्ते ठीक हैं, बस फ़ैसला जानकारी के साथ हो।

क्या मैं सिर्फ़ ज़रूरी कागज़ बदलवा लूँ?

यही सबसे बड़ी गलती है। आधे कागज़ पुराने नाम में और आधे नए में होने से सालों तक हर काउंटर पर सवाल आते हैं।

मेरे कागज़ पहले से आधे-आधे हो चुके हैं।

घबराइए नहीं। एक शपथ पत्र दोनों नामों को जोड़ देता है और ज़्यादातर दफ़्तर उसे मान लेते हैं।

सबसे पहले क्या करूँ?

विवाह पंजीकरण, क्योंकि वही प्रमाण पत्र बताता है कि नाम क्यों बदला।

अगर किसी ने अभी प्रमाण पत्र माँगा नहीं है?

तब भी करा लीजिए। बैंक, पासपोर्ट, बीमा और आधार सब आगे यही माँगते हैं।

आधार इतना पहले क्यों?

क्योंकि पैन, बैंक, लाइसेंस, वोटर सूची और पासपोर्ट, सब आपके कागज़ आधार से मिलाकर देखते हैं।

क्या गजट लगेगा?

अगर नाम सचमुच बदल रहा है तो अक्सर हाँ। सिर्फ़ वर्तनी सुधारनी हो तो अक्सर नहीं।

मेरे कागज़ दो अलग जिलों में बने हैं।

यह सामान्य बात है, कोई उलझन नहीं। इससे सिर्फ़ यह तय होता है कि कौन सा काम कहाँ कराना है।

सबसे ज़्यादा क्या भुला दिया जाता है?

माता-पिता की बीमा पॉलिसी में नामांकित के तौर पर लिखा आपका मायके वाला नाम, और उनके राशन कार्ड में आपका नाम।

कुल कितना समय लगेगा?

महीनों, इत्मीनान से। यह सामान्य है और इसका मतलब यह नहीं कि कुछ गलत हो रहा है।

पासपोर्ट का समय कब लूँ?

तभी जब गजट हाथ में आ जाए, पहले नहीं।

आधिकारिक स्रोत

यहाँ दी गई बातें इन स्रोतों और हमारे अपने काम से जाँची गई हैं। शुल्क और व्यवस्थाएँ बदलती रहती हैं, इसलिए जाने से पहले मौजूदा नियम देख लीजिए।

संस्थापक के बारे में: विपिन चौहान, बी.टेक एलएलबी, ने यह दफ़्तर शुरू किया। प्रकाशन विभाग में सीधे फाइल लगाने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव। यहाँ लिखी हर बात उन फाइलों से आई है जो हमने खुद बनाईं और प्रकाशन तक पहुँचाईं, किसी और वेबसाइट से नकल करके नहीं।

संक्षेप में

सबसे पहले वह बात जो सबसे कम बताई जाती है: भारत में कोई कानून यह नहीं कहता कि शादी के बाद औरत को अपना नाम बदलना पड़ेगा। न बदलने पर कोई दफ़्तर रुकता नहीं, कोई समय सीमा नहीं है, और कागज़ी काम असल में कम रहता है। बदलना चाहती हैं तो वह भी बिल्कुल ठीक है। बात इतनी है कि यह आपका फ़ैसला है, आदेश नहीं। और अगर बदलना है, तो असली सवाल यह नहीं कि कौन से कागज़ बदलूँ। असली सवाल यह है कि सब बदलूँ या कुछ नहीं, क्योंकि आधे कागज़ मायके के नाम में और आधे ससुराल के नाम में होना ही वह हालत है जो सालों तक हर काउंटर पर सवाल पैदा करती है। दोनों सिरे ठीक हैं, बीच का रास्ता ठीक नहीं। और एक बात जो लगभग हर कोई भूल जाता है: आपके माता-पिता की बीमा पॉलिसी में नामांकित के तौर पर अब भी आपका मायके वाला नाम लिखा है।

तय नहीं कर पा रहीं?

बता दीजिए कि मायका कहाँ है और अभी कहाँ रहती हैं। इन्हीं दो जवाबों से पूरा क्रम बनता है।

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