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दो अलग शुल्क हैं।

उत्तर प्रदेश में नाम बदलने का खर्च

आप जानना चाहते हैं कि कितना लगेगा। जवाब देने से पहले एक बात, जिससे आप किसी का भी दाम ख़ुद परख सकेंगे। इसमें दो अलग शुल्क होते हैं। एक सरकारी शुल्क, जो तय है और सरकार के पास जाता है। दूसरा सेवा शुल्क, जो काम करने वाले का है और हर जगह अलग होता है। जो लोग सिर्फ़ एक जोड़ा हुआ नंबर बताते हैं, वे यह फ़र्क़ छिपा रहे होते हैं।

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सरकारी शुल्क 1,100 रुपये सेवा शुल्क अलग से दोनों अलग पूछिए सबसे बड़ा खर्च बेकार वाला

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No spam callsFee quoted upfrontAll 75 UP districts

छोटा जवाब: सरकारी शुल्क तय है: गजट के लिए वयस्क का 1,100 और नाबालिग का 1,700 रुपये। इसके अलावा शपथ पत्र लगभग 100 से 500, दो अख़बार मिलाकर कुछ सौ, और कूरियर दो सौ के आसपास। यानी सब सरकारी और बाज़ार का खर्च मिलाकर आम तौर पर 2,000 से 3,000 रुपयेसेवा शुल्क इससे अलग है, और वह काम करने वाले का अपना होता है।

यह फ़र्क़ जान लीजिए, फिर आप किसी से भी बात कर सकते हैं, हमसे भी।

एक नज़र में

गजट शुल्क, वयस्क1,100 रुपये
गजट शुल्क, नाबालिग1,700 रुपये
शपथ पत्र100 से 500 रुपये
दो अख़बारकुछ सौ रुपये
कूरियरदो सौ के आसपास
कुल सरकारी और बाज़ारलगभग 2,000 से 3,000
सेवा शुल्कअलग, और अलग-अलग
हमाराबेसिक 999, कम्पलीट 1,999 रुपये से

मुख्य बातें

ज़रूरी बातें: Quick Facts

पहले पूछिएसरकारी शुल्क कितना है
फिर पूछिएआपकी फ़ीस कितनी है
रसीदभारतकोश की, आपके नाम से
अख़बार का बिलमाँगकर लीजिए
कुल का एक ही नंबरयह सवाल पूछने लायक है
बहुत सस्ता दामअक्सर कुछ छूट रहा होता है
बहुत महँगा दामसरकारी हिस्सा पूछकर जाँचिए
सबसे सस्ता कदमयह पूछना कि ज़रूरत है भी या नहीं

इस पन्ने में क्या है

  1. दो अलग शुल्क
  2. पूरा हिसाब, एक-एक करके
  3. सबसे बड़ा खर्च
  4. जो खर्च कोई नहीं गिनता
  5. दाम कैसे परखें
  6. हमारा दाम
  7. केंद्रीय गजट: पूरी प्रक्रिया और फाइल के प्रारूप
  8. हम कहाँ सेवा देते हैं
  9. कुछ शब्द जो बार-बार मिलेंगे
  10. इससे जुड़े पन्ने
  11. हमारा दफ़्तर क्यों
  12. आम सवाल

दो अलग शुल्क

सरकारी शुल्क सरकार के पास जाता है तय है, हर जगह एक जैसा वयस्क 1,100, नाबालिग 1,700 रसीद आपके अपने नाम से बनती है सेवा शुल्क काम करने वाले के पास जाता है कहीं तय नहीं, हर जगह अलग इसमें कागज़ बनाना, अख़बार में देना, फाइल भेजना और पीछा करना शामिल है दोनों जायज़ हैं। कोई छुपाने की बात नहीं है। छुपाने की बात तब बनती है जब दोनों को जोड़कर एक नंबर बता दिया जाए। क्योंकि तब आप यह नहीं जान पाते कि कितना सरकार को गया और कितना किसी और को। इसलिए एक ही सवाल पूछिए: "इसमें सरकारी शुल्क कितना है?" जो अलग बता दे, वह साफ़ काम कर रहा है।

हमारा दाम भी इसी तरह लिखा है, आगे इसी पन्ने पर, और उसमें सरकारी शुल्क शामिल नहीं है।

पूरा हिसाब, एक-एक करके

किस चीज़ काकितनाकिसे जाता है
गजट, वयस्क1,100 रुपयेसरकार
गजट, नाबालिग1,700 रुपयेसरकार
स्टाम्प पेपर और नोटरी100 से 500बाज़ार
दो अख़बारकुछ सौअख़बार
सीडी और टाइपिंगसौ के आसपासबाज़ार
कूरियरदो सौ के आसपासकूरियर
जोड़कर देखिए: गजट 1,100 शपथ पत्र 300 (औसत) दो अख़बार 500 (औसत) सीडी और टाइपिंग 100 कूरियर 200 ______ 2,200 रुपये के आसपास यह वह रकम है जो किसी न किसी को देनी ही है, चाहे काम आप ख़ुद करें या कोई और करे। इससे नीचे कोई नहीं जा सकता, क्योंकि इसमें सरकारी शुल्क बैठा है। और इसके ऊपर जो भी है, वह सेवा शुल्क है। अब आप कोई भी दाम सुनकर उसे दो हिस्सों में बाँट सकते हैं।

हर चरण का अलग हिसाब हमारे अंग्रेज़ी वाले खर्च पन्ने पर है।

सबसे बड़ा खर्च

तीन मुफ़्त सवाल, जो हज़ारों बचाते हैं: 1 क्या मेरा नाम कागज़ पर कभी सही था? हाँ -> यह सुधार है, गजट शायद नहीं 2 यह गजट किस काम के लिए चाहिए? इससे तय होता है केंद्रीय या राज्य 3 क्या मेरी फाइल पूरी है? दो प्रतियाँ, दो-दो गवाह, सीडी मिलती हुई तीनों का जवाब मुफ़्त है। और तीनों में से किसी एक की अनदेखी आपको पूरा खर्च दोबारा करा सकती है।

पहला सवाल हमारे सुधार बनाम परिवर्तन पन्ने पर है और दूसरा हमारे गजट वाले पन्ने पर।

जो खर्च कोई नहीं गिनता

  1. दफ़्तर के चक्कर

    हर चक्कर में आना-जाना, और अक्सर एक दिन की दिहाड़ी या छुट्टी।

  2. दूसरे जिले का सफ़र

    अगर जन्म या पढ़ाई कहीं और हुई थी, तो वहाँ जाना पड़ सकता है।

  3. फोटोकॉपी और फोटो

    छोटी रकम है, पर हर दफ़्तर में लगती है और जुड़ती जाती है।

  4. बार-बार टाइप कराना

    अगर पहली बार में सही न बना हो, जो जल्दबाज़ी में आम है।

  5. इंतज़ार का खर्च

    अगर पासपोर्ट या नौकरी अटकी है, तो देर का दाम रुपयों से बड़ा होता है।

  6. और दोबारा कराने का खर्च

    जो हमेशा पहली बार ठीक से कराने से ज़्यादा बैठता है।

इसीलिए सबसे सस्ता तरीका जल्दी करना नहीं, ठीक करना है।

दाम कैसे परखें

किसी से भी बात करते समय ये चार बातें पूछिए: [ ] इसमें सरकारी शुल्क कितना है? [ ] आपकी अपनी फ़ीस कितनी है? [ ] भारतकोश की रसीद किसके नाम से बनेगी? [ ] अख़बार का बिल मिलेगा? अगर चारों के सीधे जवाब मिल जाएँ, तो दाम चाहे जो हो, बात साफ़ है। और अगर जवाब में सिर्फ़ एक जुड़ा हुआ नंबर आए, तो एक बार और पूछिए। दो चेतावनियाँ: बहुत सस्ता दाम अक्सर उसमें सरकारी शुल्क शामिल नहीं होता, जो बाद में अलग से माँगा जाता है बहुत महँगा दाम हो सकता है ठीक हो, पर सरकारी हिस्सा पूछकर जाँच लीजिए रसीद आपके अपने नाम से बननी चाहिए। यह छोटी बात नहीं है।

हमारा दाम

बेसिक999 रुपये से
इसमें क्यासलाह, शपथ पत्र और सार्वजनिक सूचना तैयार
कम्पलीट1,999 रुपये से
इसमें क्याऊपर की सब चीज़ें, साथ में अख़बार, भुगतान, कूरियर और पीछा
सरकारी शुल्कइसमें शामिल नहीं, अलग से
रसीदभारतकोश की, आपके अपने नाम से
अख़बार का बिलआपको दिया जाता है
छिपा हुआ खर्चकोई नहीं

हम यह भी बता देते हैं जब आपको हमारी ज़रूरत नहीं है। अगर मामला सिर्फ़ वर्तनी सुधार का है तो हम वही कहते हैं, भले उसमें हमें कुछ न मिले, क्योंकि उल्टा बताने का नतीजा हम रोज़ देखते हैं।

केंद्रीय गजट: पूरी प्रक्रिया और फाइल के प्रारूप

यह देखने लायक है: पूरी प्रक्रिया नीचे दी है, प्रारूपों समेत। अगर आप ख़ुद करना चाहते हैं तो कर सकते हैं, और तब आपका खर्च सिर्फ़ सरकारी और बाज़ार का रहेगा।

चरण 1: शपथ पत्र

AFFIDAVIT (on non-judicial stamp paper, notarised) I, ____________________ S/O ____________________ , R/o ____________________________________________________ , District ____________________ , Uttar Pradesh, do hereby solemnly affirm and declare as under:- 1- That my name is recorded as ____________________ in my High School marksheet, Roll No. ____________________ , issued by ____________________ Board in the year ______ . 2- That I have changed my name from ____________________ to ____________________ and I shall hereafter be known as ____________________ for all purposes. 3- That both the said names are the name of one and the same person, that is, myself. 4- That it is my true and correct statement. DEPONENT VERIFICATION:- Verified at ____________ on this __-__-20__ that the contents of the above Affidavit are true and correct to the best of my knowledge and belief. DEPONENT

हिंदी में समझिए: स्टाम्प पेपर और नोटरी की मुहर मिलाकर 100 से 500 रुपये। शहर और दुकान के हिसाब से फ़र्क़ आता है, इसलिए एक-दो जगह पूछ लेना ठीक रहता है।

चरण 2: सार्वजनिक सूचना, दो प्रतियों में

PUBLIC NOTICE (TWO identical typed copies, each signed and witnessed) It is for general information that I, ____________________ S/O ____________________ , R/o ______________________________ ____________________________________ , declare that I have changed my name from ____________________ to ____________________ and I shall hereafter be known as ____________________ for all purposes. It is certified that I have complied with other legal requirements in this connection. ____________________ Signature of Applicant WITNESS NO. 1 Signature :- ____________________ Full Name :- ____________________ Address :- ____________________ WITNESS NO. 2 Signature :- ____________________ Full Name :- ____________________ Address :- ____________________

हिंदी में समझिए: टाइप कराने का सौ रुपये से कम। गवाह घर के लोग हो सकते हैं, उनका कोई शुल्क नहीं।

चरण 3: सीडी और सीडी प्रमाणपत्र

CD-CERTIFICATE I, ____________________ S/O ____________________ , R/o ____________________________________________________ , do hereby declare:- 1- That the matter in CD and hard copy is the same and I am responsible for any mismatch. 2- That I am responsible for the quality of CD. 3- That the CD is in MS-Word Format. 4- That the above statement is true and correct. Signature of Applicant ____________________ R/o ____________________

हिंदी में समझिए: सीडी और उस पर फाइल डालने का कुछ रुपये। किसी भी साइबर कैफ़े में हो जाता है।

चरण 4: अख़बार, शुल्क, पत्र और भेजना

  1. दो अख़बारों में सूचना छपवाइए

    दाम अख़बार और शब्दों की संख्या पर निर्भर है। बिल ज़रूर लीजिए।

  2. भारतकोश पर 1,100 रुपये जमा कीजिए

    यह वही तय सरकारी शुल्क है। रसीद अपने नाम से बनवाइए।

  3. पत्र लिखिए

    The Controller, Publication Department, Civil Line, Delhi 110054 के नाम। इसका कोई खर्च नहीं।

  4. पूरी फाइल की नकल घर पर रखिए

    फोटोकॉपी का कुछ रुपये, पर यह बचत का काम है।

  5. ट्रैकिंग वाले कूरियर से भेजिए

    दो सौ के आसपास, और यही सबसे ज़रूरी दो सौ रुपये हैं।

  6. फिर egazette.gov.in पर ख़ुद खोजिए

    इसका कोई शुल्क नहीं, और यह किसी से पूछने से तेज़ है।

सबसे सस्ता कदम मुफ़्त है

इस पूरे पन्ने की सबसे काम की बात यही है। कुछ भी खर्च करने से पहले, अपने कागज़ निकालकर यह देखिए: [ ] मेरा नाम कहाँ-कहाँ गलत है [ ] क्या वह कभी सही था [ ] काम असल में कहाँ अटका है [ ] वहाँ किसने क्या माँगा है चार सवाल। एक दोपहर। शून्य रुपये। और इनके जवाब से अक्सर यह निकलता है कि: गजट की ज़रूरत नहीं थी या सिर्फ़ एक कागज़ ठीक कराना था या एक शपथ पत्र काफ़ी था लोग इसका उल्टा करते हैं। पहले पैसा खर्च करते हैं, फिर पता चलता है कि क्या चाहिए था। सस्ता होने का सबसे भरोसेमंद तरीका यही है कि पहले जान लीजिए।

शुल्क, समय और फाइल

वयस्क गजट शुल्क1,100 रुपये
नाबालिग गजट शुल्क1,700 रुपये
सब मिलाकर, ख़ुद करें तोलगभग 2,000 से 3,000
हमारे साथऊपर का सब, साथ में 999 या 1,999 से
समयलगभग 25 से 45 दिन
दोबारा कराने परपूरा खर्च फिर से
बेकार गजटपूरा 1,100 और डेढ़ महीना

लिफ़ाफ़े में यह सब जाता है: मोबाइल और ईमेल सहित पत्र, नोटरी किया शपथ पत्र, दो प्रतियों में टाइप की सार्वजनिक सूचना जिन पर दो-दो गवाह हों, एमएस वर्ड की सीडी और उसका प्रमाणपत्र, दोनों अख़बारों के पूरे पन्ने, पहचान पत्र, पते का प्रमाण, फोटो और भारतकोश की रसीद।

पैसा देने से पहले जाँच लीजिए

खर्च के बाद क्या

भारतकोश की रसीद, अख़बार का बिल और गजट की पीडीएफ़, तीनों संभालकर रखिए। पहली दो चीज़ें आपका खर्च साबित करती हैं और तीसरी आपका काम। आगे किसी सवाल में यही तीनों जवाब बनती हैं।

जो दूसरी वेबसाइटें गलत बताती हैं

हम कहाँ सेवा देते हैं

उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में, और दाम हर जिले में एक जैसा है:

मध्यलखनऊ, कानपुर, उन्नाव, हरदोई, सीतापुर, रायबरेली, बाराबंकी
पश्चिमनोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, आगरा, अलीगढ़, मथुरा, मुरादाबाद, सहारनपुर
पूर्ववाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, आजमगढ़, जौनपुर, बलिया, देवरिया, गाज़ीपुर
बुंदेलखंडझाँसी, बाँदा, महोबा, हमीरपुर, चित्रकूट, जालौन
रुहेलखंडबरेली, शाहजहाँपुर, पीलीभीत, बदायूँ, रामपुर, बिजनौर, अमरोहा

दूर के जिले से होने पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगता, क्योंकि कागज़ फोटो और कूरियर से आते-जाते हैं। हमारा चैंबर Chamber No. 19, Sadar Tehsil, Sector 5, Gomti Nagar Vistar, Lucknow 226010 में है। फ़ोन 9540003316 या व्हाट्सएप 9540005002

कुछ शब्द जो बार-बार मिलेंगे

सरकारी शुल्क
वह रकम जो सरकार के पास जाती है और जो तय है। गजट के लिए वयस्क का 1,100 और नाबालिग का 1,700 रुपये।
सेवा शुल्क
काम करने वाले की अपनी फ़ीस। कहीं तय नहीं, इसलिए हमेशा अलग से पूछनी चाहिए।
भारतकोश
सरकारी शुल्क ऑनलाइन जमा करने का पोर्टल। रसीद आपके अपने नाम से बननी चाहिए।
नाम सुधार
जब नाम कागज़ पर कभी सही था और गलत टाइप हुआ। इसमें अक्सर गजट नहीं लगता, और यही सबसे बड़ी बचत है।
राज्य गजट
राज्य सरकार का गजट, जो सस्ता लगता है पर हर जगह नहीं चलता। बाद में केंद्रीय भी कराना पड़ सकता है।
पावती
किसी भी आवेदन की रसीद, जो आगे पूछताछ और शिकायत का आधार बनती है।

आगे जो भी काम हो, उसके लिए यहाँ एक पन्ना है:

हम दाम दो हिस्सों में क्यों बताते हैं

जब कोई फ़ोन पर पूछता है कि कितना लगेगा, तो हम एक नंबर नहीं बताते। हम कहते हैं कि सरकारी शुल्क इतना है और हमारा इतना, और रसीद आपके अपने नाम से बनेगी। इससे हमारा काम थोड़ा मुश्किल हो जाता है, क्योंकि तुलना करना आसान हो जाता है। पर हमें यही ठीक लगता है, क्योंकि जो लोग जुड़ा हुआ नंबर सुनकर काम शुरू कराते हैं, उन्हें कभी पता ही नहीं चलता कि पैसा कहाँ गया। और सबसे ज़रूरी बात, हम यह भी बता देते हैं जब आपको गजट की ज़रूरत ही नहीं है। विपिन चौहान, बी.टेक एलएलबी, दाम अलग-अलग बताते हैं।

Associate office at Chamber No. 19, Sadar Tehsil, Sector 5, Gomti Nagar Vistar, Lucknow 226010, serving all 75 districts of Uttar Pradesh, Monday to Saturday, 10 AM to 6:30 PM. फ़ोन 9540003316 या व्हाट्सएप 9540005002

दाम पूछ लीजिए, दोनों अलग-अलग

Uttar Pradesh Name Change

Associate Office: Chamber No. 19, Sadar Tehsil, Sector 5, Gomti Nagar Vistar, Lucknow, Uttar Pradesh 226010

Head Office: Metro Pillar 337, Hardev Nagar, Street 1, Shop No 1 (Shri Sham Documentation)

फ़ोन: 9540003316

व्हाट्सएप: 9540005002

ईमेल: info@uttarpradeshnamechange.com

समय: सोमवार से शनिवार, सुबह 10 से शाम 6:30 बजे

बता दीजिए कि नाम कहाँ गलत है और काम कहाँ अटका है। हम पहले यही बताएँगे कि गजट चाहिए भी या नहीं।

कॉल और नाम परिवर्तन प्रारूप पाइए

फ़ॉर्म खुल रहा है...

बेकार कॉल नहींसरकारी शुल्क और हमारी फ़ीस अलग-अलग

आम सवाल

कुल कितना खर्च आता है?

ख़ुद करने पर लगभग 2,000 से 3,000 रुपये, जिसमें 1,100 का सरकारी शुल्क शामिल है। सेवा शुल्क इससे अलग होता है।

गजट का सरकारी शुल्क कितना है?

वयस्क के लिए 1,100 और नाबालिग के लिए 1,700 रुपये। यह तय है और हर जगह एक जैसा।

किसी ने बहुत कम दाम बताया है।

पूछिए कि उसमें सरकारी शुल्क शामिल है या नहीं। अक्सर वह बाद में अलग से माँगा जाता है।

किसी ने बहुत ज़्यादा बताया है।

पूछिए कि इसमें सरकारी शुल्क कितना है और आपकी फ़ीस कितनी। जो अलग बता दे, वह साफ़ काम कर रहा है।

सबसे बड़ा खर्च क्या होता है?

वह गजट जिसकी ज़रूरत ही नहीं थी। अगर नाम कागज़ पर कभी सही था तो वह सुधार है, और उसमें गजट नहीं लगता।

यह कैसे पता करूँ?

अपने कागज़ देखकर, और यह जानने में एक रुपया भी नहीं लगता।

राज्य का गजट सस्ता है, वही करा लूँ?

तब अक्सर आगे केंद्रीय भी कराना पड़ता है, यानी दोनों का दाम। पहले पूछिए कि किस काम के लिए चाहिए।

रसीद किसके नाम से बनती है?

भारतकोश की रसीद आपके अपने नाम से बननी चाहिए। यह छोटी बात नहीं है।

क्या मैं ख़ुद कर सकता हूँ?

हाँ। पूरी प्रक्रिया और सारे प्रारूप इसी पन्ने पर हैं, और तब आपका खर्च सिर्फ़ सरकारी और बाज़ार का रहेगा।

दूर के जिले से होने पर ज़्यादा लगेगा?

नहीं। कागज़ फोटो और कूरियर से आते-जाते हैं, इसलिए दूरी का कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं।

फाइल वापस आ जाए तो?

तब पूरा खर्च दोबारा लगता है। इसीलिए पहली बार में पूरी फाइल भेजना सबसे सस्ता तरीका है।

आपकी फ़ीस में सरकारी शुल्क शामिल है?

नहीं। हमारा 999 या 1,999 रुपये से शुरू होता है और सरकारी शुल्क उससे अलग है।

आधिकारिक स्रोत

यहाँ दी गई रकमें इन स्रोतों और हमारे अपने काम से जाँची गई हैं। सरकारी शुल्क बदल सकते हैं और बाज़ार के दाम शहर के हिसाब से अलग होते हैं, इसलिए भुगतान से पहले मौजूदा शुल्क देख लीजिए।

संस्थापक के बारे में: विपिन चौहान, बी.टेक एलएलबी, ने यह दफ़्तर शुरू किया। प्रकाशन विभाग में सीधे फाइल लगाने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव। यहाँ लिखी हर बात उन फाइलों से आई है जो हमने खुद बनाईं और प्रकाशन तक पहुँचाईं, किसी और वेबसाइट से नकल करके नहीं।

संक्षेप में

दाम पूछने से पहले यह जान लीजिए कि पैसा किसके पास जाता है, क्योंकि इसमें दो अलग शुल्क होते हैं। सरकारी शुल्क तय है, हर जगह एक जैसा, और सरकार के पास जाता है, गजट के लिए वयस्क का 1,100 और नाबालिग का 1,700 रुपये। सेवा शुल्क काम करने वाले का अपना है और कहीं तय नहीं। दोनों जायज़ हैं और छुपाने की कोई बात नहीं, पर छुपाने की बात तब बन जाती है जब दोनों को जोड़कर एक नंबर बता दिया जाए, क्योंकि तब आप जान ही नहीं पाते कि कितना कहाँ गया। सब मिलाकर, ख़ुद करने पर, लगभग दो से तीन हज़ार रुपये लगते हैं। और सबसे बड़ा खर्च वह गजट होता है जिसकी ज़रूरत ही नहीं थी, यानी वह मामला जो असल में सिर्फ़ वर्तनी सुधार का था। उसे बचाने वाला सवाल मुफ़्त है, और वह पैसा खर्च करने से पहले पूछा जाना चाहिए, बाद में नहीं।

दाम परखना है?

किसी से भी पूछिए कि इसमें सरकारी शुल्क कितना है। जो अलग बता दे, वह साफ़ काम कर रहा है।

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