छोटा जवाब: सरकारी शुल्क तय है: गजट के लिए वयस्क का 1,100 और नाबालिग का 1,700 रुपये। इसके अलावा शपथ पत्र लगभग 100 से 500, दो अख़बार मिलाकर कुछ सौ, और कूरियर दो सौ के आसपास। यानी सब सरकारी और बाज़ार का खर्च मिलाकर आम तौर पर 2,000 से 3,000 रुपये। सेवा शुल्क इससे अलग है, और वह काम करने वाले का अपना होता है।
यह फ़र्क़ जान लीजिए, फिर आप किसी से भी बात कर सकते हैं, हमसे भी।
एक नज़र में
| गजट शुल्क, वयस्क | 1,100 रुपये |
| गजट शुल्क, नाबालिग | 1,700 रुपये |
| शपथ पत्र | 100 से 500 रुपये |
| दो अख़बार | कुछ सौ रुपये |
| कूरियर | दो सौ के आसपास |
| कुल सरकारी और बाज़ार | लगभग 2,000 से 3,000 |
| सेवा शुल्क | अलग, और अलग-अलग |
| हमारा | बेसिक 999, कम्पलीट 1,999 रुपये से |
मुख्य बातें
- सरकारी शुल्क तय है, सेवा शुल्क नहीं।
- दोनों अलग-अलग पूछिए, जुड़ा हुआ नंबर मत लीजिए।
- सबसे बड़ा खर्च वह है जिसकी ज़रूरत ही नहीं थी।
- उसे बचाने वाला सवाल मुफ़्त है।
- दोबारा कराना हमेशा पहली बार से महँगा है।
ज़रूरी बातें: Quick Facts
| पहले पूछिए | सरकारी शुल्क कितना है |
| फिर पूछिए | आपकी फ़ीस कितनी है |
| रसीद | भारतकोश की, आपके नाम से |
| अख़बार का बिल | माँगकर लीजिए |
| कुल का एक ही नंबर | यह सवाल पूछने लायक है |
| बहुत सस्ता दाम | अक्सर कुछ छूट रहा होता है |
| बहुत महँगा दाम | सरकारी हिस्सा पूछकर जाँचिए |
| सबसे सस्ता कदम | यह पूछना कि ज़रूरत है भी या नहीं |
इस पन्ने में क्या है
- दो अलग शुल्क
- पूरा हिसाब, एक-एक करके
- सबसे बड़ा खर्च
- जो खर्च कोई नहीं गिनता
- दाम कैसे परखें
- हमारा दाम
- केंद्रीय गजट: पूरी प्रक्रिया और फाइल के प्रारूप
- हम कहाँ सेवा देते हैं
- कुछ शब्द जो बार-बार मिलेंगे
- इससे जुड़े पन्ने
- हमारा दफ़्तर क्यों
- आम सवाल
दो अलग शुल्क
हमारा दाम भी इसी तरह लिखा है, आगे इसी पन्ने पर, और उसमें सरकारी शुल्क शामिल नहीं है।
पूरा हिसाब, एक-एक करके
| किस चीज़ का | कितना | किसे जाता है |
|---|---|---|
| गजट, वयस्क | 1,100 रुपये | सरकार |
| गजट, नाबालिग | 1,700 रुपये | सरकार |
| स्टाम्प पेपर और नोटरी | 100 से 500 | बाज़ार |
| दो अख़बार | कुछ सौ | अख़बार |
| सीडी और टाइपिंग | सौ के आसपास | बाज़ार |
| कूरियर | दो सौ के आसपास | कूरियर |
हर चरण का अलग हिसाब हमारे अंग्रेज़ी वाले खर्च पन्ने पर है।
सबसे बड़ा खर्च
- सबसे बड़ा खर्च वह गजट है जिसकी ज़रूरत ही नहीं थी, और यह सबसे आम भी है।
- अगर आपके कागज़ पर नाम कभी सही था और सिर्फ़ गलत टाइप हुआ, तो वह सुधार है और उसमें गजट नहीं लगता।
- यह जानने में एक रुपया नहीं लगता, बस अपने कागज़ देखकर एक सवाल पूछना होता है।
- दूसरा बड़ा खर्च राज्य का गजट कराकर फिर केंद्रीय कराना है, यानी दोनों का दाम।
- तीसरा है अधूरी फाइल भेजना, जो वापस आती है और सब दोबारा करना पड़ता है।
पहला सवाल हमारे सुधार बनाम परिवर्तन पन्ने पर है और दूसरा हमारे गजट वाले पन्ने पर।
जो खर्च कोई नहीं गिनता
दफ़्तर के चक्कर
हर चक्कर में आना-जाना, और अक्सर एक दिन की दिहाड़ी या छुट्टी।
दूसरे जिले का सफ़र
अगर जन्म या पढ़ाई कहीं और हुई थी, तो वहाँ जाना पड़ सकता है।
फोटोकॉपी और फोटो
छोटी रकम है, पर हर दफ़्तर में लगती है और जुड़ती जाती है।
बार-बार टाइप कराना
अगर पहली बार में सही न बना हो, जो जल्दबाज़ी में आम है।
इंतज़ार का खर्च
अगर पासपोर्ट या नौकरी अटकी है, तो देर का दाम रुपयों से बड़ा होता है।
और दोबारा कराने का खर्च
जो हमेशा पहली बार ठीक से कराने से ज़्यादा बैठता है।
इसीलिए सबसे सस्ता तरीका जल्दी करना नहीं, ठीक करना है।
दाम कैसे परखें
हमारा दाम
| बेसिक | 999 रुपये से |
| इसमें क्या | सलाह, शपथ पत्र और सार्वजनिक सूचना तैयार |
| कम्पलीट | 1,999 रुपये से |
| इसमें क्या | ऊपर की सब चीज़ें, साथ में अख़बार, भुगतान, कूरियर और पीछा |
| सरकारी शुल्क | इसमें शामिल नहीं, अलग से |
| रसीद | भारतकोश की, आपके अपने नाम से |
| अख़बार का बिल | आपको दिया जाता है |
| छिपा हुआ खर्च | कोई नहीं |
हम यह भी बता देते हैं जब आपको हमारी ज़रूरत नहीं है। अगर मामला सिर्फ़ वर्तनी सुधार का है तो हम वही कहते हैं, भले उसमें हमें कुछ न मिले, क्योंकि उल्टा बताने का नतीजा हम रोज़ देखते हैं।
केंद्रीय गजट: पूरी प्रक्रिया और फाइल के प्रारूप
यह देखने लायक है: पूरी प्रक्रिया नीचे दी है, प्रारूपों समेत। अगर आप ख़ुद करना चाहते हैं तो कर सकते हैं, और तब आपका खर्च सिर्फ़ सरकारी और बाज़ार का रहेगा।
चरण 1: शपथ पत्र
हिंदी में समझिए: स्टाम्प पेपर और नोटरी की मुहर मिलाकर 100 से 500 रुपये। शहर और दुकान के हिसाब से फ़र्क़ आता है, इसलिए एक-दो जगह पूछ लेना ठीक रहता है।
चरण 2: सार्वजनिक सूचना, दो प्रतियों में
हिंदी में समझिए: टाइप कराने का सौ रुपये से कम। गवाह घर के लोग हो सकते हैं, उनका कोई शुल्क नहीं।
चरण 3: सीडी और सीडी प्रमाणपत्र
हिंदी में समझिए: सीडी और उस पर फाइल डालने का कुछ रुपये। किसी भी साइबर कैफ़े में हो जाता है।
चरण 4: अख़बार, शुल्क, पत्र और भेजना
दो अख़बारों में सूचना छपवाइए
दाम अख़बार और शब्दों की संख्या पर निर्भर है। बिल ज़रूर लीजिए।
भारतकोश पर 1,100 रुपये जमा कीजिए
यह वही तय सरकारी शुल्क है। रसीद अपने नाम से बनवाइए।
पत्र लिखिए
The Controller, Publication Department, Civil Line, Delhi 110054 के नाम। इसका कोई खर्च नहीं।
पूरी फाइल की नकल घर पर रखिए
फोटोकॉपी का कुछ रुपये, पर यह बचत का काम है।
ट्रैकिंग वाले कूरियर से भेजिए
दो सौ के आसपास, और यही सबसे ज़रूरी दो सौ रुपये हैं।
फिर egazette.gov.in पर ख़ुद खोजिए
इसका कोई शुल्क नहीं, और यह किसी से पूछने से तेज़ है।
सबसे सस्ता कदम मुफ़्त है
शुल्क, समय और फाइल
| वयस्क गजट शुल्क | 1,100 रुपये |
| नाबालिग गजट शुल्क | 1,700 रुपये |
| सब मिलाकर, ख़ुद करें तो | लगभग 2,000 से 3,000 |
| हमारे साथ | ऊपर का सब, साथ में 999 या 1,999 से |
| समय | लगभग 25 से 45 दिन |
| दोबारा कराने पर | पूरा खर्च फिर से |
| बेकार गजट | पूरा 1,100 और डेढ़ महीना |
लिफ़ाफ़े में यह सब जाता है: मोबाइल और ईमेल सहित पत्र, नोटरी किया शपथ पत्र, दो प्रतियों में टाइप की सार्वजनिक सूचना जिन पर दो-दो गवाह हों, एमएस वर्ड की सीडी और उसका प्रमाणपत्र, दोनों अख़बारों के पूरे पन्ने, पहचान पत्र, पते का प्रमाण, फोटो और भारतकोश की रसीद।
पैसा देने से पहले जाँच लीजिए
- सरकारी शुल्क और सेवा शुल्क अलग-अलग पूछ लिए?
- यह तय हुआ कि गजट चाहिए भी या नहीं?
- रसीद आपके अपने नाम से बनेगी, यह पक्का है?
- अख़बार का बिल मिलेगा?
खर्च के बाद क्या
भारतकोश की रसीद, अख़बार का बिल और गजट की पीडीएफ़, तीनों संभालकर रखिए। पहली दो चीज़ें आपका खर्च साबित करती हैं और तीसरी आपका काम। आगे किसी सवाल में यही तीनों जवाब बनती हैं।
जो दूसरी वेबसाइटें गलत बताती हैं
- गलत: कुल इतना लगेगा, बस। सही: सरकारी और सेवा शुल्क अलग-अलग हैं, दोनों पूछिए।
- गलत: सबसे सस्ता वाला चुन लीजिए। सही: बहुत सस्ते में अक्सर सरकारी शुल्क शामिल नहीं होता।
- गलत: गजट हर हाल में कराना है। सही: वर्तनी सुधार में अक्सर नहीं, और यही सबसे बड़ी बचत है।
- गलत: राज्य वाला सस्ता है तो वही करा लीजिए। सही: बाद में केंद्रीय भी कराना पड़े तो दोनों का दाम लगता है।
- गलत: रसीद की क्या ज़रूरत। सही: भारतकोश की रसीद आपके अपने नाम से बननी चाहिए।
हम कहाँ सेवा देते हैं
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में, और दाम हर जिले में एक जैसा है:
| मध्य | लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, हरदोई, सीतापुर, रायबरेली, बाराबंकी |
| पश्चिम | नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, आगरा, अलीगढ़, मथुरा, मुरादाबाद, सहारनपुर |
| पूर्व | वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, आजमगढ़, जौनपुर, बलिया, देवरिया, गाज़ीपुर |
| बुंदेलखंड | झाँसी, बाँदा, महोबा, हमीरपुर, चित्रकूट, जालौन |
| रुहेलखंड | बरेली, शाहजहाँपुर, पीलीभीत, बदायूँ, रामपुर, बिजनौर, अमरोहा |
दूर के जिले से होने पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगता, क्योंकि कागज़ फोटो और कूरियर से आते-जाते हैं। हमारा चैंबर Chamber No. 19, Sadar Tehsil, Sector 5, Gomti Nagar Vistar, Lucknow 226010 में है। फ़ोन 9540003316 या व्हाट्सएप 9540005002।
कुछ शब्द जो बार-बार मिलेंगे
- सरकारी शुल्क
- वह रकम जो सरकार के पास जाती है और जो तय है। गजट के लिए वयस्क का 1,100 और नाबालिग का 1,700 रुपये।
- सेवा शुल्क
- काम करने वाले की अपनी फ़ीस। कहीं तय नहीं, इसलिए हमेशा अलग से पूछनी चाहिए।
- भारतकोश
- सरकारी शुल्क ऑनलाइन जमा करने का पोर्टल। रसीद आपके अपने नाम से बननी चाहिए।
- नाम सुधार
- जब नाम कागज़ पर कभी सही था और गलत टाइप हुआ। इसमें अक्सर गजट नहीं लगता, और यही सबसे बड़ी बचत है।
- राज्य गजट
- राज्य सरकार का गजट, जो सस्ता लगता है पर हर जगह नहीं चलता। बाद में केंद्रीय भी कराना पड़ सकता है।
- पावती
- किसी भी आवेदन की रसीद, जो आगे पूछताछ और शिकायत का आधार बनती है।
इससे जुड़े पन्ने
आगे जो भी काम हो, उसके लिए यहाँ एक पन्ना है:
- नाम परिवर्तन की पूरी प्रक्रिया: हिंदी में, हर प्रारूप के साथ।
- गजट में नाम परिवर्तन: कौन सा गजट, और क्यों।
- पिता के नाम में सुधार: जहाँ अक्सर शपथ पत्र काफ़ी होता है।
- the same guide in English: यही जानकारी अंग्रेज़ी में।
- सुधार या परिवर्तन: वह मुफ़्त सवाल जो सबसे ज़्यादा बचाता है।
- गजट का समय और शुल्क: सिर्फ़ गजट वाला हिस्सा।
- भारतकोश पर भुगतान: कदम दर कदम।
- फाइल क्यों वापस आती है: दोबारा खर्च से बचिए।
- कितना समय लगता है: पूरा क्रम।
- चालीस सवालों के जवाब: असर के हिसाब से क्रम में।
- दफ़्तर से संपर्क: फ़ोन और व्हाट्सएप।
हम दाम दो हिस्सों में क्यों बताते हैं
जब कोई फ़ोन पर पूछता है कि कितना लगेगा, तो हम एक नंबर नहीं बताते। हम कहते हैं कि सरकारी शुल्क इतना है और हमारा इतना, और रसीद आपके अपने नाम से बनेगी। इससे हमारा काम थोड़ा मुश्किल हो जाता है, क्योंकि तुलना करना आसान हो जाता है। पर हमें यही ठीक लगता है, क्योंकि जो लोग जुड़ा हुआ नंबर सुनकर काम शुरू कराते हैं, उन्हें कभी पता ही नहीं चलता कि पैसा कहाँ गया। और सबसे ज़रूरी बात, हम यह भी बता देते हैं जब आपको गजट की ज़रूरत ही नहीं है। विपिन चौहान, बी.टेक एलएलबी, दाम अलग-अलग बताते हैं।
- दोनों शुल्क अलग बताते हैं: सरकारी और अपना।
- रसीद आपके नाम से बनवाते हैं: भारतकोश की।
- अख़बार का बिल देते हैं: बिना माँगे।
- ज़रूरत न हो तो मना करते हैं: भले काम हाथ से जाए।
Associate office at Chamber No. 19, Sadar Tehsil, Sector 5, Gomti Nagar Vistar, Lucknow 226010, serving all 75 districts of Uttar Pradesh, Monday to Saturday, 10 AM to 6:30 PM. फ़ोन 9540003316 या व्हाट्सएप 9540005002।
दाम पूछ लीजिए, दोनों अलग-अलग
Uttar Pradesh Name Change
Associate Office: Chamber No. 19, Sadar Tehsil, Sector 5, Gomti Nagar Vistar, Lucknow, Uttar Pradesh 226010
Head Office: Metro Pillar 337, Hardev Nagar, Street 1, Shop No 1 (Shri Sham Documentation)
फ़ोन: 9540003316
व्हाट्सएप: 9540005002
ईमेल: info@uttarpradeshnamechange.com
समय: सोमवार से शनिवार, सुबह 10 से शाम 6:30 बजे
बता दीजिए कि नाम कहाँ गलत है और काम कहाँ अटका है। हम पहले यही बताएँगे कि गजट चाहिए भी या नहीं।
कॉल और नाम परिवर्तन प्रारूप पाइए
फ़ॉर्म खुल रहा है...
आम सवाल
कुल कितना खर्च आता है?
ख़ुद करने पर लगभग 2,000 से 3,000 रुपये, जिसमें 1,100 का सरकारी शुल्क शामिल है। सेवा शुल्क इससे अलग होता है।
गजट का सरकारी शुल्क कितना है?
वयस्क के लिए 1,100 और नाबालिग के लिए 1,700 रुपये। यह तय है और हर जगह एक जैसा।
किसी ने बहुत कम दाम बताया है।
पूछिए कि उसमें सरकारी शुल्क शामिल है या नहीं। अक्सर वह बाद में अलग से माँगा जाता है।
किसी ने बहुत ज़्यादा बताया है।
पूछिए कि इसमें सरकारी शुल्क कितना है और आपकी फ़ीस कितनी। जो अलग बता दे, वह साफ़ काम कर रहा है।
सबसे बड़ा खर्च क्या होता है?
वह गजट जिसकी ज़रूरत ही नहीं थी। अगर नाम कागज़ पर कभी सही था तो वह सुधार है, और उसमें गजट नहीं लगता।
यह कैसे पता करूँ?
अपने कागज़ देखकर, और यह जानने में एक रुपया भी नहीं लगता।
राज्य का गजट सस्ता है, वही करा लूँ?
तब अक्सर आगे केंद्रीय भी कराना पड़ता है, यानी दोनों का दाम। पहले पूछिए कि किस काम के लिए चाहिए।
रसीद किसके नाम से बनती है?
भारतकोश की रसीद आपके अपने नाम से बननी चाहिए। यह छोटी बात नहीं है।
क्या मैं ख़ुद कर सकता हूँ?
हाँ। पूरी प्रक्रिया और सारे प्रारूप इसी पन्ने पर हैं, और तब आपका खर्च सिर्फ़ सरकारी और बाज़ार का रहेगा।
दूर के जिले से होने पर ज़्यादा लगेगा?
नहीं। कागज़ फोटो और कूरियर से आते-जाते हैं, इसलिए दूरी का कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं।
फाइल वापस आ जाए तो?
तब पूरा खर्च दोबारा लगता है। इसीलिए पहली बार में पूरी फाइल भेजना सबसे सस्ता तरीका है।
आपकी फ़ीस में सरकारी शुल्क शामिल है?
नहीं। हमारा 999 या 1,999 रुपये से शुरू होता है और सरकारी शुल्क उससे अलग है।
आधिकारिक स्रोत
- प्रकाशन विभाग, सिविल लाइन, दिल्ली 110054, गजट शुल्क और प्रकाशन के लिए।
- भारतकोश, निर्धारित सरकारी शुल्क जमा करने का पोर्टल।
- ई-गजट पोर्टल egazette.gov.in, प्रकाशित अधिसूचना खोजने के लिए।
- उत्तर प्रदेश में स्टाम्प और नोटरी से जुड़ी व्यवस्था।
यहाँ दी गई रकमें इन स्रोतों और हमारे अपने काम से जाँची गई हैं। सरकारी शुल्क बदल सकते हैं और बाज़ार के दाम शहर के हिसाब से अलग होते हैं, इसलिए भुगतान से पहले मौजूदा शुल्क देख लीजिए।
संक्षेप में
दाम पूछने से पहले यह जान लीजिए कि पैसा किसके पास जाता है, क्योंकि इसमें दो अलग शुल्क होते हैं। सरकारी शुल्क तय है, हर जगह एक जैसा, और सरकार के पास जाता है, गजट के लिए वयस्क का 1,100 और नाबालिग का 1,700 रुपये। सेवा शुल्क काम करने वाले का अपना है और कहीं तय नहीं। दोनों जायज़ हैं और छुपाने की कोई बात नहीं, पर छुपाने की बात तब बन जाती है जब दोनों को जोड़कर एक नंबर बता दिया जाए, क्योंकि तब आप जान ही नहीं पाते कि कितना कहाँ गया। सब मिलाकर, ख़ुद करने पर, लगभग दो से तीन हज़ार रुपये लगते हैं। और सबसे बड़ा खर्च वह गजट होता है जिसकी ज़रूरत ही नहीं थी, यानी वह मामला जो असल में सिर्फ़ वर्तनी सुधार का था। उसे बचाने वाला सवाल मुफ़्त है, और वह पैसा खर्च करने से पहले पूछा जाना चाहिए, बाद में नहीं।
