छोटा जवाब: ज़्यादातर लोगों के लिए केंद्रीय गजट ही सही है, क्योंकि पासपोर्ट, बैंक, बोर्ड, बीमा और नौकरी की जाँच में वही माना जाता है। इसकी फाइल प्रकाशन विभाग, सिविल लाइन, दिल्ली जाती है, शुल्क 1,100 रुपये है और लगभग 25 से 45 दिन लगते हैं। राज्य का गजट पास ज़रूर है, पर वह हर जगह नहीं चलता। पहले यह देखिए कि गजट किस काम के लिए चाहिए, फिर तय कीजिए।
यह एक फ़ैसला है, दूरी का सवाल नहीं। और यही वह जगह है जहाँ सबसे ज़्यादा पैसा दो बार लगता है।
एक नज़र में
| कितने गजट हैं | दो, और एक जैसे नहीं |
| केंद्रीय गजट | दिल्ली, डाक से, हर जगह मान्य |
| राज्य गजट | लखनऊ, पर सीमित जगह चलता है |
| पासपोर्ट, बैंक, बोर्ड | केंद्रीय वाला माँगते हैं |
| शुल्क | वयस्क 1,100, नाबालिग 1,700 रुपये |
| समय | लगभग 25 से 45 दिन |
| कहाँ जाना है | कहीं नहीं, यह डाक का काम है |
| प्रकाशन कहाँ दिखेगा | egazette.gov.in पर, भाग 4 में |
मुख्य बातें
- गजट काम देखकर चुनिए, नज़दीकी देखकर नहीं।
- केंद्रीय गजट हर जगह चलता है, राज्य वाला हर जगह नहीं।
- पास वाला चुनने से अक्सर दोनों कराने पड़ते हैं।
- प्रदेश में गजट का कोई काउंटर नहीं है।
- प्रकाशन का समय कोई कम नहीं कर सकता।
ज़रूरी कागज़: Quick Facts
| हाईस्कूल अंकतालिका | नाम की गवाही |
| शपथ पत्र | नोटरी किया हुआ |
| सार्वजनिक सूचना | दो प्रतियाँ, दो-दो गवाह |
| सीडी | एमएस वर्ड में |
| दो अख़बार | पूरे पन्ने, छह प्रतियाँ |
| भारतकोश रसीद | 1,100 रुपये की |
| पहचान और पते का प्रमाण | आधार आमतौर पर |
| फोटो | हाल की |
इस पन्ने में क्या है
- दो गजट, एक जैसे नहीं
- आपके काम में कौन सा चलेगा
- पास वाला चुनने का जाल
- काउंटर कहाँ है
- समय क्यों नहीं घटता
- प्रकाशन कैसे खोजें
- केंद्रीय गजट: पूरी प्रक्रिया और फाइल के प्रारूप
- हम कहाँ सेवा देते हैं
- कुछ शब्द जो बार-बार मिलेंगे
- इससे जुड़े पन्ने
- हमारा दफ़्तर क्यों
- आम सवाल
दो गजट, एक जैसे नहीं
यही सवाल पहले पूछा जाना चाहिए, और यही सबसे कम पूछा जाता है।
आपके काम में कौन सा चलेगा
| यह किस काम के लिए है | आम तौर पर क्या चलता है |
|---|---|
| पासपोर्ट | केंद्रीय |
| बैंक और बीमा | केंद्रीय |
| बोर्ड और विश्वविद्यालय | केंद्रीय |
| निजी नौकरी की जाँच | केंद्रीय |
| राज्य सरकार की कुछ सेवाएँ | राज्य वाला भी चल सकता है |
सरकारी नौकरी वाला हिस्सा हमारे सरकारी कर्मचारी पन्ने पर है।
पास वाला चुनने का जाल
- राज्य का गजट पास है, इसलिए भरोसेमंद लगता है, पर नज़दीकी का मान्यता से कोई रिश्ता नहीं है।
- अक्सर वह सस्ता भी होता है, जो फ़ैसले को और आसान बना देता है।
- फिर पासपोर्ट या बैंक में वह नहीं चलता, और तब केंद्रीय भी कराना पड़ता है।
- यानी दोनों का खर्च और दोनों का इंतज़ार, जबकि एक से काम हो सकता था।
- पहले यह पूछिए कि गजट किस काम के लिए चाहिए, यही एक सवाल पूरा खर्च तय कर देता है।
काउंटर कहाँ है
केंद्रीय गजट का कोई दफ़्तर उत्तर प्रदेश में नहीं है
न लखनऊ में, न किसी और जिले में। यह सुनकर ज़्यादातर लोग हैरान होते हैं।
पूरी फाइल दिल्ली जाती है
प्रकाशन विभाग, सिविल लाइन, दिल्ली 110054 के पते पर।
यानी यह डाक का काम है
लाइन में लगने का नहीं, और न ही किसी से मिलने का।
दूरी से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता
बलिया से भेजी फाइल और गाजियाबाद से भेजी फाइल एक जैसी पढ़ी जाती हैं।
ट्रैकिंग वाला कूरियर इस्तेमाल कीजिए
ताकि पता रहे कि लिफ़ाफ़ा पहुँचा या नहीं।
और पूरी नकल घर पर रखिए
क्योंकि भेजी हुई फाइल वापस नहीं आती।
समय क्यों नहीं घटता
फाइल किन वजहों से वापस आती है, यह हमारे अस्वीकृति वाले पन्ने पर है।
प्रकाशन कैसे खोजें
- प्रकाशन egazette.gov.in पर आता है, नाम परिवर्तन आमतौर पर भाग 4 में छपता है।
- वहीं खोजिए, फ़ोन मत कीजिए, क्योंकि खोजने में मिनट लगते हैं और फ़ोन में दिन।
- पीडीएफ़ डाउनलोड करके रख लीजिए, और उसका प्रिंट भी निकाल लीजिए।
- कई दफ़्तर छपा हुआ पन्ना माँगते हैं, इसलिए सिर्फ़ फ़ाइल फ़ोन में रखना काफ़ी नहीं।
- यही पीडीएफ़ आगे सालों तक काम आती है, इसलिए ईमेल पर भी भेजकर रख लीजिए।
खोजने का तरीका हमारे स्थिति देखने वाले पन्ने पर और डाउनलोड का हमारे डाउनलोड पन्ने पर है।
केंद्रीय गजट: पूरी प्रक्रिया और फाइल के प्रारूप
हमारी मुख्य सेवा: प्रारूप अंग्रेज़ी में बनते हैं, क्योंकि विभाग को इसी भाषा में जाते हैं। हर एक के नीचे हिंदी में समझाया गया है।
चरण 1: शपथ पत्र
हिंदी में समझिए: पहली पंक्ति में अपना नाम, पिता का नाम, पूरा पता और जिला। बिंदु एक में वह नाम जो अंकतालिका पर छपा है, उसका अनुक्रमांक और बोर्ड। बिंदु दो में पुराना और नया नाम। अनुक्रमांक ज़रूर लिखिए, क्योंकि आगे हर काउंटर उसी से मिलाकर देखता है।
चरण 2: सार्वजनिक सूचना, दो प्रतियों में
हिंदी में समझिए: यही कागज़ दो बार टाइप होगा, बिल्कुल एक जैसा। दोनों पर आपके दस्तखत और दो गवाहों के दस्तखत, पूरा नाम और पता। घर के लोग गवाह बन सकते हैं। दूसरी प्रति पर गवाह के दस्तखत छूट जाना फाइल वापस आने का सबसे आम कारण है।
चरण 3: सीडी और सीडी प्रमाणपत्र
हिंदी में समझिए: सार्वजनिक सूचना का वही मजमून एक सीडी में एमएस वर्ड फाइल के रूप में जाता है। कागज़ पर आख़िरी वक़्त कोई सुधार किया और सीडी में नहीं किया, तो फाइल वापस आ जाती है।
चरण 4: अख़बार, शुल्क, पत्र और भेजना
दो अख़बारों में सूचना छपवाइए
अपने जिले का एक हिंदी दैनिक और एक अंग्रेज़ी अख़बार, हर एक के पूरे पन्ने की छह प्रतियाँ।
भारतकोश पर 1,100 रुपये जमा कीजिए
सही मद और कार्यालय चुनकर, और दो रसीदें प्रिंट कर लीजिए।
पत्र लिखिए
The Controller, Publication Department, Civil Line, Delhi 110054 के नाम, अपना मोबाइल और ईमेल देकर।
पूरी फाइल की नकल घर पर रखिए
क्योंकि भेजी हुई फाइल वापस नहीं आती।
ट्रैकिंग वाले कूरियर से भेजिए
प्रदेश के ज़्यादातर जिलों से दिल्ली एक से तीन दिन।
फिर egazette.gov.in पर खोजते रहिए
भाग 4 में, अपने नाम से। यही सबसे तेज़ तरीका है।
एक सवाल, पहले
सुधार और परिवर्तन का पूरा फ़र्क़ हमारे सुधार बनाम परिवर्तन पन्ने पर है।
शुल्क, समय और फाइल
| वयस्क गजट शुल्क | 1,100 रुपये |
| नाबालिग गजट शुल्क | 1,700 रुपये |
| अख़बार | हर अख़बार के कुछ सौ रुपये |
| शपथ पत्र | स्टाम्प और नोटरी मिलाकर 100 से 500 रुपये |
| कूरियर | दो सौ रुपये के आसपास |
| समय | लगभग 25 से 45 दिन, घटता नहीं |
| हमारी सेवा | बेसिक 999 रुपये से, कम्पलीट 1,999 रुपये से, अलग से |
लिफ़ाफ़े में यह सब जाता है: मोबाइल और ईमेल सहित पत्र, नोटरी किया शपथ पत्र, दो प्रतियों में टाइप की सार्वजनिक सूचना जिन पर दो-दो गवाह हों, एमएस वर्ड की सीडी और उसका प्रमाणपत्र, दोनों अख़बारों के पूरे पन्ने, पहचान पत्र, पते का प्रमाण, फोटो और भारतकोश की रसीद।
भेजने से पहले जाँच लीजिए
- तय हुआ कि केंद्रीय चाहिए या राज्य वाला?
- यह सुधार तो नहीं, जिसमें गजट लगता ही नहीं?
- दोनों प्रतियों पर दोनों गवाहों के दस्तखत हैं?
- सीडी का मजमून कागज़ से बिल्कुल मिलता है?
गजट के बाद कौन सा कागज़
पहले आधार, फिर पैन, फिर बैंक, फिर जो आपकी अपनी ज़रूरत हो। गजट की पीडीएफ़, दोनों अख़बार के पन्ने और शपथ पत्र, तीनों एक साथ हमेशा संभालकर रखिए। यही तिकड़ी आगे सालों तक हर सवाल का जवाब है।
जो दूसरी वेबसाइटें गलत बताती हैं
- गलत: गजट एक ही होता है। सही: दो हैं, और हर जगह दोनों नहीं चलते।
- गलत: पास वाला करा लीजिए। सही: काम देखकर चुनिए, वरना दोनों कराने पड़ते हैं।
- गलत: गजट का दफ़्तर लखनऊ में है। सही: केंद्रीय गजट का कोई दफ़्तर प्रदेश में नहीं है।
- गलत: हफ़्ते भर में हो जाएगा। सही: 25 से 45 दिन, और कोई इसे कम नहीं कर सकता।
- गलत: हर मामले में गजट चाहिए। सही: सिर्फ़ वर्तनी सुधार में अक्सर नहीं चाहिए।
हम कहाँ सेवा देते हैं
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में। गजट का काम हर जिले से एक जैसा है, इसलिए दूरी कोई बाधा नहीं:
| मध्य | लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, हरदोई, सीतापुर, रायबरेली, बाराबंकी |
| पश्चिम | नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, आगरा, अलीगढ़, मथुरा, मुरादाबाद, सहारनपुर |
| पूर्व | वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, आजमगढ़, जौनपुर, बलिया, देवरिया, गाज़ीपुर |
| बुंदेलखंड | झाँसी, बाँदा, महोबा, हमीरपुर, चित्रकूट, जालौन |
| रुहेलखंड | बरेली, शाहजहाँपुर, पीलीभीत, बदायूँ, रामपुर, बिजनौर, अमरोहा |
आपका जिला सिर्फ़ इतना तय करता है कि सूचना किन अख़बारों में छपेगी। बाकी सब हर जगह एक जैसा है। हमारा चैंबर Chamber No. 19, Sadar Tehsil, Sector 5, Gomti Nagar Vistar, Lucknow 226010 में है। फ़ोन 9540003316 या व्हाट्सएप 9540005002, किसी भी जिले से।
कुछ शब्द जो बार-बार मिलेंगे
- केंद्रीय गजट
- भारत सरकार का सरकारी पत्र, जिसकी फाइल दिल्ली जाती है और जो देश भर में माना जाता है।
- राज्य गजट
- राज्य सरकार का गजट, जो पास तो है पर हर दफ़्तर में नहीं चलता।
- भाग 4
- केंद्रीय गजट का वह हिस्सा जिसमें निजी सूचनाएँ छपती हैं, जैसे नाम परिवर्तन।
- प्रकाशन विभाग
- दिल्ली का वह दफ़्तर जहाँ केंद्रीय गजट की सारी फाइलें जाती हैं, सिविल लाइन, दिल्ली 110054।
- भारतकोश
- सरकारी शुल्क ऑनलाइन जमा करने का पोर्टल, जहाँ गजट का 1,100 रुपये शुल्क भरा जाता है।
- सार्वजनिक सूचना
- गजट फाइल में जाने वाला टाइप किया कागज़, दो एक जैसी प्रतियों में, हर एक पर दो गवाह।
इससे जुड़े पन्ने
आगे जो भी काम हो, उसके लिए यहाँ एक पन्ना है:
- नाम परिवर्तन की पूरी प्रक्रिया: हिंदी में, हर प्रारूप के साथ।
- शादी के बाद नाम: कानून क्या नहीं कहता, और आधा बदलना महँगा क्यों है।
- the gazette guide in English: यही जानकारी अंग्रेज़ी में।
- केंद्रीय बनाम राज्य गजट: पूरी तुलना, विस्तार से।
- समय और शुल्क: हर चरण का हिसाब।
- फाइल क्यों वापस आती है: आम वजहें।
- प्रकाशन कैसे खोजें: फ़ोन के बजाय खोज।
- कॉपी कैसे डाउनलोड करें: भाग 4 की पीडीएफ़।
- सुधार या परिवर्तन: वह सवाल जो पैसा बचाता है।
- चालीस सवालों के जवाब: असर के हिसाब से क्रम में।
- दफ़्तर से संपर्क: फ़ोन और व्हाट्सएप।
हम पहले यह क्यों पूछते हैं कि किसलिए चाहिए
फ़ोन उठाते ही हमारा पहला सवाल यह नहीं होता कि नया नाम क्या है। हम पूछते हैं कि गजट किस काम के लिए चाहिए, क्योंकि उसी से तय होता है कि केंद्रीय कराना है या नहीं, और कई बार यह भी निकल आता है कि गजट की ज़रूरत ही नहीं है। यह सवाल हमारा काम कम कर देता है, फिर भी हम पूछते हैं, क्योंकि दोबारा गजट कराने आया हुआ आदमी बताता है कि पहली बार किसी ने यह नहीं पूछा था। विपिन चौहान, बी.टेक एलएलबी, पाँच साल से यही सवाल पहले पूछते आ रहे हैं।
- पहले काम पूछते हैं, फिर गजट: क्योंकि काम ही तय करता है कि कौन सा।
- यह भी बताते हैं कि कब ज़रूरत नहीं है: भले हमारा काम कम हो जाए।
- समय के बारे में सच बताते हैं: 25 से 45 दिन, कोई वादा नहीं।
- पूरे प्रदेश से कागज़ कूरियर और फोटो से लेते हैं: किसी को आना नहीं पड़ता।
Associate office at Chamber No. 19, Sadar Tehsil, Sector 5, Gomti Nagar Vistar, Lucknow 226010, serving all 75 districts of Uttar Pradesh, Monday to Saturday, 10 AM to 6:30 PM. फ़ोन 9540003316 या व्हाट्सएप 9540005002।
बता दीजिए किस काम के लिए चाहिए
Uttar Pradesh Name Change
Associate Office: Chamber No. 19, Sadar Tehsil, Sector 5, Gomti Nagar Vistar, Lucknow, Uttar Pradesh 226010
Head Office: Metro Pillar 337, Hardev Nagar, Street 1, Shop No 1 (Shri Sham Documentation)
फ़ोन: 9540003316
व्हाट्सएप: 9540005002
ईमेल: info@uttarpradeshnamechange.com
समय: सोमवार से शनिवार, सुबह 10 से शाम 6:30 बजे
सिर्फ़ इतना बता दीजिए कि गजट किस काम के लिए चाहिए, और अंकतालिका की फोटो भेज दीजिए। बाकी हम बता देंगे।
कॉल और नाम परिवर्तन प्रारूप पाइए
फ़ॉर्म खुल रहा है...
आम सवाल
केंद्रीय और राज्य गजट में क्या फ़र्क़ है?
केंद्रीय भारत सरकार का है और देश भर में माना जाता है। राज्य वाला पास ज़रूर है, पर हर दफ़्तर उसे नहीं मानता।
मुझे कौन सा कराना चाहिए?
यह देखिए कि गजट किस काम के लिए चाहिए। पासपोर्ट, बैंक, बोर्ड और नौकरी की जाँच में आम तौर पर केंद्रीय ही चलता है।
राज्य वाला सस्ता है, वही करा लूँ?
तब अक्सर आगे चलकर केंद्रीय भी कराना पड़ता है, यानी दोनों का खर्च। पहले यह पूछ लीजिए कि किसलिए चाहिए।
गजट का दफ़्तर उत्तर प्रदेश में कहाँ है?
केंद्रीय गजट का कोई दफ़्तर प्रदेश में नहीं है। पूरी फाइल डाक से दिल्ली जाती है।
तो क्या मुझे दिल्ली जाना पड़ेगा?
नहीं। यह डाक का काम है, किसी से मिलने का नहीं।
दूर के जिले से भेजने पर देर होगी?
नहीं। फाइलें क्रम से देखी जाती हैं और कूरियर को दूरी से फ़र्क़ नहीं पड़ता।
कितना समय लगता है?
लगभग 25 से 45 दिन। कोई इसे कम नहीं कर सकता।
कोई हफ़्ते भर में कराने को कह रहा है।
तो वह या तो कुछ और कर रहा है या अंदाज़ा लगा रहा है। समय दिल्ली का विभाग तय करता है।
शुल्क कितना है?
वयस्क के लिए 1,100 और नाबालिग के लिए 1,700 रुपये, भारतकोश पर ऑनलाइन।
प्रकाशन कहाँ दिखेगा?
egazette.gov.in पर, आमतौर पर भाग 4 में। पीडीएफ़ डाउनलोड करके प्रिंट भी रख लीजिए।
फाइल सबसे ज़्यादा किस वजह से वापस आती है?
दूसरी प्रति पर गवाह के दस्तखत छूट जाना, और सीडी का मजमून कागज़ से न मिलना।
क्या मेरे मामले में गजट लगेगा भी?
अगर नाम कागज़ पर कभी सही था और सिर्फ़ गलत टाइप हुआ है, तो अक्सर नहीं लगता।
आधिकारिक स्रोत
- प्रकाशन विभाग, सिविल लाइन, दिल्ली 110054, केंद्रीय गजट अधिसूचना के लिए।
- ई-गजट पोर्टल egazette.gov.in, जहाँ भाग 4 में प्रकाशित अधिसूचना खोजी जा सकती है।
- भारतकोश, निर्धारित शुल्क जमा करने के लिए।
- राजकीय मुद्रणालय, उत्तर प्रदेश, राज्य गजट से जुड़ी व्यवस्था के लिए।
यहाँ दी गई बातें इन स्रोतों और हमारे अपने काम से जाँची गई हैं। शुल्क और व्यवस्थाएँ बदलती रहती हैं, इसलिए फाइल भेजने से पहले मौजूदा नियम देख लीजिए।
संक्षेप में
भारत में दो गजट हैं और बहुत कम लोगों को यह बताया जाता है। एक केंद्रीय गजट, जिसकी फाइल दिल्ली के प्रकाशन विभाग जाती है और जो देश भर में माना जाता है। दूसरा राज्य का गजट, जो लखनऊ में है, पास लगता है और अक्सर सस्ता भी होता है। दोनों असली हैं, दोनों सरकारी हैं, पर सवाल यह नहीं है कि कौन सा सही है। सवाल यह है कि आपके काम में कौन सा चलेगा, और पासपोर्ट, बैंक, बोर्ड तथा नौकरी की जाँच में आम तौर पर केंद्रीय ही चलता है। जो लोग पास वाला चुन लेते हैं, उनमें से कई छह महीने बाद दोबारा आते हैं, क्योंकि तब तक कोई ऐसा काम आ जाता है जिसमें वह नहीं चलता, और फिर दोनों का खर्च लगता है। इसलिए सबसे पहले यही पूछिए कि गजट किस काम के लिए चाहिए। और उससे भी पहले यह कि नाम कागज़ पर कभी सही था या नहीं, क्योंकि अगर था तो यह सुधार है और गजट की ज़रूरत शायद है ही नहीं।
