छोटा जवाब: पहले यह देखिए कि नाम गलत है या सिर्फ़ अलग-अलग तरह लिखा है। अगर वर्तनी अलग है, तो अक्सर सुधार की ज़रूरत नहीं पड़ती, एक शपथ पत्र से काम बन जाता है जो कहता है कि दोनों एक ही व्यक्ति हैं। अगर सचमुच गलत है तो सुधार उसी दफ़्तर में होगा जिसने वह कागज़ जारी किया, और सबूत में पिता के अपने कागज़ लगेंगे, आपके नहीं।
यह उलझन इतनी आम है कि लगभग हर परिवार में मिलती है, और इसकी वजह भी सीधी है।
एक नज़र में
| यह नाम किसका है | आपका नहीं, आपके पिता का |
| सबूत किसका चाहिए | उनका, आपका नहीं |
| अलग वर्तनी है | अक्सर शपथ पत्र से काम |
| सचमुच गलत है | जारी करने वाले दफ़्तर में सुधार |
| हर कागज़ के लिए | अलग दफ़्तर, अलग आवेदन |
| क्या गजट चलेगा | नहीं, यह आपका नाम नहीं है |
| पिता नहीं रहे | उनके बचे हुए कागज़ काम आते हैं |
| उनके पास कागज़ नहीं | तब शपथ पत्र वाला रास्ता |
मुख्य बातें
- यह नाम आपका नहीं है, इसलिए आपका सबूत नहीं चलता।
- अलग वर्तनी और गलत नाम, दोनों अलग बातें हैं।
- अक्सर एक शपथ पत्र से पूरा काम बन जाता है।
- गजट इस मामले में काम नहीं आता।
- हर कागज़ का सुधार अपने दफ़्तर में होता है।
ज़रूरी कागज़: Quick Facts
| आपकी अंकतालिका | जिस पर उनका नाम लिखा है |
| पिता की अंकतालिका | अगर मिल जाए, सबसे मज़बूत |
| पिता का आधार या पैन | उनका सही नाम दिखाने के लिए |
| पुराने कागज़ | ज़मीन, राशन कार्ड, नौकरी के |
| शपथ पत्र | एक ही व्यक्ति होने का |
| सूची | हर कागज़ पर जो लिखा है, वैसा |
| पावती | हर आवेदन की |
| धीरज | यह कई दफ़्तरों का काम है |
इस पन्ने में क्या है
- यह नाम किसका है
- हर कागज़ पर अलग क्यों लिखा है
- अक्सर शपथ पत्र से काम बन जाता है
- गजट यहाँ क्यों नहीं चलता
- पहले सूची बनाइए
- पिता नहीं रहे तो
- केंद्रीय गजट: पूरी प्रक्रिया और फाइल के प्रारूप
- हम कहाँ सेवा देते हैं
- कुछ शब्द जो बार-बार मिलेंगे
- इससे जुड़े पन्ने
- हमारा दफ़्तर क्यों
- आम सवाल
यह नाम किसका है
यही बात माता के नाम पर भी लागू होती है, और वह हमारे माता के नाम वाले पन्ने पर है।
हर कागज़ पर अलग क्यों लिखा है
| क्यों होता है | उदाहरण |
|---|---|
| अलग समय, अलग लिपिक | राम कुमार, रामकुमार |
| हिंदी से अंग्रेज़ी में लिखते समय | Ram Kumar, Ram Kumaar |
| उपनाम कभी लिखा, कभी नहीं | राम कुमार सिंह, राम कुमार |
| ख़ुद उन्होंने ही अलग लिखा | आर. के. सिंह, रामकुमार सिंह |
| सम्मान सूचक जोड़ दिया | श्री राम कुमार |
अक्सर शपथ पत्र से काम बन जाता है
- एक ही व्यक्ति होने का शपथ पत्र कहता है कि नाम के ये सब रूप एक ही आदमी के हैं।
- ज़्यादातर दफ़्तर इसे मान लेते हैं, ख़ासकर जब अंतर सिर्फ़ वर्तनी या उपनाम का हो।
- यह पाँच जगह सुधार कराने से बहुत सस्ता और तेज़ है, और नतीजा वही निकलता है।
- इसमें हर रूप को नाम से लिखा जाता है, ताकि कोई सवाल न बचे।
- पर हर जगह नहीं चलता, इसलिए जहाँ काम अटका है वहाँ पहले पूछ लीजिए कि वे क्या माँग रहे हैं।
पूरा प्रारूप और कहाँ-कहाँ चलता है, यह हमारे वर्तनी मेल न खाने वाले पन्ने पर है।
गजट यहाँ क्यों नहीं चलता
गजट कब चाहिए और कब नहीं, यह हमारे गजट वाले पन्ने पर है।
पहले सूची बनाइए
अपने सारे कागज़ निकालिए
अंकतालिका, जन्म प्रमाण पत्र, आधार, पैन, राशन कार्ड, नौकरी के कागज़।
हर एक पर पिता का नाम जैसा लिखा है, वैसा उतारिए
अक्षर दर अक्षर, बिना सुधारे। यही असली तस्वीर है।
देखिए कितने अलग रूप बने
अक्सर दो या तीन ही निकलते हैं, पाँच नहीं जितना लगता था।
तय कीजिए कौन सा सही है
पिता के अपने कागज़ देखकर, आपके नहीं।
फिर देखिए कि काम कहाँ अटका है
अक्सर सिर्फ़ एक जगह अटका होता है, और वहीं का हल काफ़ी है।
वहीं पूछिए कि उन्हें क्या चाहिए
शपथ पत्र या सुधार, यह वे बताएँगे। बाकी जगह हाथ मत लगाइए।
अंतिम कदम सबसे ज़रूरी है। लोग एक जगह अटकने पर सारे कागज़ सुधरवाने निकल पड़ते हैं, जो महीनों और हज़ारों रुपये ले जाता है।
पिता नहीं रहे तो
- उनके बचे हुए कागज़ ही सबूत बनते हैं, आधार, पैन, ज़मीन के कागज़, पेंशन या नौकरी के दस्तावेज़।
- मृत्यु प्रमाण पत्र भी साथ लगता है, जिस पर उनका नाम दर्ज होता है।
- शपथ पत्र आप दे सकते हैं, पुत्र या पुत्री के रूप में, यह बताते हुए कि ये सब नाम एक ही व्यक्ति के हैं।
- अगर उनके पास कोई कागज़ था ही नहीं, जो पुरानी पीढ़ी में आम है, तो शपथ पत्र वाला रास्ता ही बचता है।
- ऐसे मामलों में दफ़्तर आम तौर पर समझते हैं, बशर्ते आपकी बात एक जैसी और लिखित हो।
यह स्थिति दुर्लभ नहीं है और इसका हल है। बस उसमें थोड़ा ज़्यादा धीरज लगता है।
केंद्रीय गजट: पूरी प्रक्रिया और फाइल के प्रारूप
ध्यान दीजिए: यह हिस्सा तब काम आता है जब आपका अपना नाम बदल रहा हो। पिता के नाम के सुधार के लिए गजट नहीं लगता, इसलिए इसे केवल तभी पढ़िए जब दोनों काम एक साथ करने हों।
चरण 1: शपथ पत्र
हिंदी में समझिए: यह प्रारूप बाकी पन्नों से अलग है। यहाँ बिंदु दो में हर वह कागज़ लिखा जाता है जिस पर नाम अलग है, और बिंदु तीन में साफ़ कहा जाता है कि ये सब एक ही व्यक्ति हैं तथा सही नाम कौन सा है। यही वह कागज़ है जो पाँच अलग सुधारों की जगह ले लेता है।
चरण 2: सार्वजनिक सूचना, दो प्रतियों में
हिंदी में समझिए: यह केवल तब बनता है जब आपका अपना नाम बदल रहा हो। दो प्रतियाँ, दोनों पर दो गवाहों के दस्तखत, पूरा नाम और पता।
चरण 3: सीडी और सीडी प्रमाणपत्र
चरण 4: अख़बार, शुल्क, पत्र और भेजना
दो अख़बारों में सूचना छपवाइए
एक हिंदी दैनिक और एक अंग्रेज़ी अख़बार, पूरे पन्ने की छह प्रतियाँ।
भारतकोश पर 1,100 रुपये जमा कीजिए
ऑनलाइन, दो रसीदें प्रिंट कर लीजिए।
पत्र लिखिए
The Controller, Publication Department, Civil Line, Delhi 110054 के नाम।
पूरी फाइल की नकल घर पर रखिए
क्योंकि भेजी हुई फाइल वापस नहीं आती।
ट्रैकिंग वाले कूरियर से भेजिए
दिल्ली एक से तीन दिन।
पिता के नाम का काम अलग चलता रहेगा
वह इस फाइल का हिस्सा नहीं है।
एक जगह से शुरू कीजिए, सब जगह से नहीं
शुल्क, समय और फाइल
| शपथ पत्र | स्टाम्प और नोटरी मिलाकर 100 से 500 रुपये |
| हर दफ़्तर का सुधार शुल्क | अलग-अलग, वहीं पूछिए |
| बोर्ड में सुधार | बोर्ड का निर्धारित शुल्क |
| अगर अपना गजट भी चाहिए | वयस्क 1,100 रुपये |
| शपथ पत्र वाला रास्ता | कुछ दिन |
| सुधार वाला रास्ता | हफ़्तों से महीनों तक |
| हमारी सेवा | बेसिक 999 रुपये से, कम्पलीट 1,999 रुपये से, अलग से |
यही वजह है कि शपथ पत्र वाला रास्ता पहले आज़माना चाहिए। वह सस्ता है, तेज़ है, और अक्सर पूरा काम कर देता है।
शुरू करने से पहले जाँच लीजिए
- सूची बन गई, हर कागज़ पर जैसा लिखा है वैसा?
- पिता के अपने कागज़ मिले, या शपथ पत्र वाला रास्ता लेना है?
- पता है कि काम असल में कहाँ अटका है?
- वहाँ पूछ लिया कि उन्हें क्या चाहिए?
सुधार के बाद क्या
जो कागज़ सुधर जाए उसकी नकलें करा लीजिए, और शपथ पत्र की भी कई प्रतियाँ रख लीजिए। वही शपथ पत्र आगे और जगह काम आएगा, क्योंकि यह उलझन एक बार में पूरी तरह खत्म कम ही होती है।
जो दूसरी वेबसाइटें गलत बताती हैं
- गलत: गजट करा लीजिए, पिता का नाम ठीक हो जाएगा। सही: गजट अपने ही नाम के लिए होता है।
- गलत: आपका आधार दिखा दीजिए। सही: आपके कागज़ तो वही नाम दोहरा रहे हैं, सबूत उनका चाहिए।
- गलत: सारे कागज़ एक साथ सुधरवा लीजिए। सही: पहले वहीं देखिए जहाँ अटका है, अक्सर वही काफ़ी है।
- गलत: हर अंतर एक गलती है। सही: अलग वर्तनी अलग बात है, और उसका हल शपथ पत्र है।
- गलत: पिता नहीं रहे तो कुछ नहीं हो सकता। सही: उनके बचे कागज़ और आपका शपथ पत्र काम करते हैं।
हम कहाँ सेवा देते हैं
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में। यह काम अक्सर कई दफ़्तरों में फैला होता है, इसलिए क्रम बनाना सबसे ज़रूरी है:
| मध्य | लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, हरदोई, सीतापुर, रायबरेली, बाराबंकी |
| पश्चिम | नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, आगरा, अलीगढ़, मथुरा, मुरादाबाद, सहारनपुर |
| पूर्व | वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, आजमगढ़, जौनपुर, बलिया, देवरिया, गाज़ीपुर |
| बुंदेलखंड | झाँसी, बाँदा, महोबा, हमीरपुर, चित्रकूट, जालौन |
| रुहेलखंड | बरेली, शाहजहाँपुर, पीलीभीत, बदायूँ, रामपुर, बिजनौर, अमरोहा |
कागज़ों की फोटो व्हाट्सएप पर भेज दीजिए, हम सूची बनाकर बता देंगे कि सुधार कहाँ चाहिए और कहाँ शपथ पत्र काफ़ी है। हमारा चैंबर Chamber No. 19, Sadar Tehsil, Sector 5, Gomti Nagar Vistar, Lucknow 226010 में है। फ़ोन 9540003316 या व्हाट्सएप 9540005002।
कुछ शब्द जो बार-बार मिलेंगे
- एक ही व्यक्ति का शपथ पत्र
- वह शपथ पत्र जो कहता है कि नाम के अलग-अलग रूप एक ही आदमी के हैं। इस मामले में सबसे काम का कागज़।
- वर्तनी का अंतर
- जब नाम वही है पर लिखने का तरीका अलग है, जैसे राम कुमार और रामकुमार। यह गलती नहीं मानी जाती।
- नाम सुधार
- जब नाम सचमुच गलत दर्ज है। यह उसी दफ़्तर में होता है जिसने कागज़ जारी किया।
- जारी करने वाला दफ़्तर
- वह निकाय या बोर्ड जिसने कागज़ बनाया। सुधार वहीं होता है, कहीं और नहीं।
- गजट
- अपने ही नाम के परिवर्तन के लिए। किसी और के नाम के लिए यह काम नहीं आता।
- पावती
- आवेदन जमा करने की रसीद, जो आगे पूछताछ का आधार बनती है।
इससे जुड़े पन्ने
आगे जो भी काम हो, उसके लिए यहाँ एक पन्ना है:
- नाम परिवर्तन की पूरी प्रक्रिया: हिंदी में, हर प्रारूप के साथ।
- गजट में नाम परिवर्तन: कब चाहिए और कब नहीं।
- यूपी बोर्ड मार्कशीट सुधार: रास्ता स्कूल से जाता है।
- the same guide in English: यही जानकारी अंग्रेज़ी में।
- वर्तनी मेल नहीं खाती: शपथ पत्र का पूरा प्रारूप।
- बोर्ड मार्कशीट में पिता का नाम: सबसे आम मामला।
- आधार में पिता का नाम: वहाँ की अलग व्यवस्था।
- माता के नाम में सुधार: वही नियम, दूसरा नाम।
- दो नाम, अलग कागज़ों में: जोड़ने वाला रास्ता।
- चालीस सवालों के जवाब: असर के हिसाब से क्रम में।
- दफ़्तर से संपर्क: फ़ोन और व्हाट्सएप।
हम पहले सूची क्यों बनवाते हैं
पिता के नाम वाले मामलों में हमारा पहला काम कोई आवेदन बनाना नहीं होता। हम कहते हैं कि सारे कागज़ निकालिए और हर एक पर जो लिखा है वह अक्षर दर अक्षर उतार दीजिए। ज़्यादातर लोग यह करके ख़ुद हैरान होते हैं, क्योंकि जितने अलग नाम उन्हें लगते थे उतने निकलते ही नहीं, अक्सर दो या तीन ही होते हैं। फिर हम पूछते हैं कि काम असल में कहाँ अटका है, क्योंकि सिर्फ़ वहीं का हल चाहिए, सब जगह का नहीं। और अगर एक शपथ पत्र से काम बनता दिखे तो हम वही बताते हैं, भले उसमें हमारा काम कम हो। विपिन चौहान, बी.टेक एलएलबी, सूची से शुरू करते हैं।
- पहले सूची बनवाते हैं: क्योंकि असली तस्वीर वहीं दिखती है।
- अटकी हुई जगह पहचानते हैं: सिर्फ़ वहीं का हल चाहिए।
- शपथ पत्र पहले आज़माते हैं: सस्ता, तेज़ और अक्सर काफ़ी।
- बेवजह गजट नहीं कराते: इस काम में वह लगता ही नहीं।
Associate office at Chamber No. 19, Sadar Tehsil, Sector 5, Gomti Nagar Vistar, Lucknow 226010, serving all 75 districts of Uttar Pradesh, Monday to Saturday, 10 AM to 6:30 PM. फ़ोन 9540003316 या व्हाट्सएप 9540005002।
सूची भेज दीजिए
Uttar Pradesh Name Change
Associate Office: Chamber No. 19, Sadar Tehsil, Sector 5, Gomti Nagar Vistar, Lucknow, Uttar Pradesh 226010
Head Office: Metro Pillar 337, Hardev Nagar, Street 1, Shop No 1 (Shri Sham Documentation)
फ़ोन: 9540003316
व्हाट्सएप: 9540005002
ईमेल: info@uttarpradeshnamechange.com
समय: सोमवार से शनिवार, सुबह 10 से शाम 6:30 बजे
हर कागज़ पर पिता का नाम जैसा लिखा है, वैसा लिखकर भेज दीजिए, और बता दीजिए कि काम कहाँ अटका है।
कॉल और नाम परिवर्तन प्रारूप पाइए
फ़ॉर्म खुल रहा है...
आम सवाल
क्या गजट से पिता का नाम सुधर जाएगा?
नहीं। गजट अपने ही नाम के परिवर्तन के लिए होता है, और यह नाम आपका नहीं है।
तो सबूत क्या दूँ?
पिता के अपने कागज़। आपके कागज़ तो वही नाम दोहरा रहे हैं जो आप बदलवाना चाहते हैं।
हर कागज़ पर अलग लिखा है, क्या करूँ?
पहले सूची बनाइए। अक्सर दो या तीन ही रूप निकलते हैं, और एक शपथ पत्र से काम बन जाता है।
शपथ पत्र में क्या लिखा जाता है?
हर वह कागज़ जिस पर नाम अलग है, और यह कि ये सब एक ही व्यक्ति हैं तथा सही नाम कौन सा है।
क्या हर दफ़्तर शपथ पत्र मान लेता है?
ज़्यादातर मान लेते हैं, ख़ासकर वर्तनी वाले अंतर में। पर जहाँ काम अटका है वहाँ पहले पूछ लीजिए।
क्या सारे कागज़ एक साथ सुधरवा लूँ?
नहीं। पहले वहीं देखिए जहाँ अटका है। बाकी कागज़ बरसों से ऐसे ही चल रहे हैं।
वर्तनी अलग होना गलती है?
आम तौर पर नहीं। अलग समय, अलग लिपिक और हिंदी से अंग्रेज़ी में लिखने से यह होता है।
पिता नहीं रहे, अब क्या?
उनके बचे हुए कागज़ और मृत्यु प्रमाण पत्र सबूत बनते हैं, और शपथ पत्र आप दे सकते हैं।
उनके पास कोई कागज़ ही नहीं था।
पुरानी पीढ़ी में यह आम है। तब शपथ पत्र वाला रास्ता ही बचता है, और दफ़्तर आम तौर पर समझते हैं।
मार्कशीट में पिता का नाम गलत है।
वह बोर्ड में सुधरता है, उसी रास्ते जिससे आपका अपना नाम सुधरता है, यानी स्कूल के ज़रिए।
माता के नाम का भी यही नियम है?
हाँ, बिल्कुल वही। नाम किसी और का है, इसलिए सबूत भी उन्हीं का चाहिए।
कितना समय लगता है?
शपथ पत्र वाला रास्ता कुछ दिन का है। सुधार वाला रास्ता हफ़्तों से महीनों तक जा सकता है।
आधिकारिक स्रोत
- उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद, अभिलेख सुधार के लिए।
- संबंधित नगर निगम, पालिका या ग्राम पंचायत, जन्म रिकॉर्ड के लिए।
- भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण, आधार से जुड़े ब्योरे के लिए।
- उत्तर प्रदेश में शपथ पत्र और नोटरी से जुड़ी व्यवस्था।
यहाँ दी गई बातें इन स्रोतों और हमारे अपने काम से जाँची गई हैं। हर दफ़्तर की माँग अलग हो सकती है, इसलिए जहाँ काम अटका है वहीं पूछकर आगे बढ़िए।
संक्षेप में
इस मामले में एक बात पूरा रास्ता बदल देती है: यह नाम आपका है ही नहीं। वह आपके कागज़ पर लिखा है, पर बताता किसी और को है। इसलिए जब आप अपना नाम सुधरवाते हैं तो आपके पुराने कागज़ सबूत बनते हैं, पर यहाँ वे कुछ साबित नहीं करते, क्योंकि वे तो वही नाम दोहरा रहे हैं। सबूत पिता के अपने कागज़ों से आना है। दूसरी बात यह कि हर कागज़ पर नाम अलग होना किसी की गलती नहीं है। वे अलग बरसों में, अलग दफ़्तरों में, अलग लोगों ने भरे थे, और उस पीढ़ी के बहुत से लोगों ने ख़ुद भी अपना नाम कहीं पूरा और कहीं छोटा लिखा। इसलिए असली सवाल यह नहीं कि किसने गलती की, बल्कि यह कि इन सब रूपों को जोड़ने वाला कागज़ कौन सा है। और उसका जवाब अक्सर एक शपथ पत्र होता है, पाँच अलग-अलग सुधार नहीं।
