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यह नाम आपका नहीं है।

पिता के नाम में सुधार कैसे कराएँ

आपके कागज़ों पर पिता का नाम अलग-अलग तरह लिखा है, और कहीं काम अटक गया है। एक बात पहले समझ लीजिए, क्योंकि इसी से पूरा रास्ता तय होता है। यह नाम आपका है ही नहीं। वह आपके कागज़ पर लिखा है, पर बताता किसी और को है। इसलिए इसे सुधरवाने के लिए आपका सबूत काफ़ी नहीं, उनके कागज़ चाहिए। और कई बार सुधार की ज़रूरत ही नहीं पड़ती।

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सबूत उनका, आपका नहीं अक्सर सुधार की ज़रूरत नहीं एक शपथ पत्र से काम हर कागज़ अलग दफ़्तर

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छोटा जवाब: पहले यह देखिए कि नाम गलत है या सिर्फ़ अलग-अलग तरह लिखा है। अगर वर्तनी अलग है, तो अक्सर सुधार की ज़रूरत नहीं पड़ती, एक शपथ पत्र से काम बन जाता है जो कहता है कि दोनों एक ही व्यक्ति हैं। अगर सचमुच गलत है तो सुधार उसी दफ़्तर में होगा जिसने वह कागज़ जारी किया, और सबूत में पिता के अपने कागज़ लगेंगे, आपके नहीं।

यह उलझन इतनी आम है कि लगभग हर परिवार में मिलती है, और इसकी वजह भी सीधी है।

पिता के नाम में सुधार
पहले सूची बनाइए। अक्सर दो या तीन ही रूप निकलते हैं।

एक नज़र में

यह नाम किसका हैआपका नहीं, आपके पिता का
सबूत किसका चाहिएउनका, आपका नहीं
अलग वर्तनी हैअक्सर शपथ पत्र से काम
सचमुच गलत हैजारी करने वाले दफ़्तर में सुधार
हर कागज़ के लिएअलग दफ़्तर, अलग आवेदन
क्या गजट चलेगानहीं, यह आपका नाम नहीं है
पिता नहीं रहेउनके बचे हुए कागज़ काम आते हैं
उनके पास कागज़ नहींतब शपथ पत्र वाला रास्ता

मुख्य बातें

ज़रूरी कागज़: Quick Facts

आपकी अंकतालिकाजिस पर उनका नाम लिखा है
पिता की अंकतालिकाअगर मिल जाए, सबसे मज़बूत
पिता का आधार या पैनउनका सही नाम दिखाने के लिए
पुराने कागज़ज़मीन, राशन कार्ड, नौकरी के
शपथ पत्रएक ही व्यक्ति होने का
सूचीहर कागज़ पर जो लिखा है, वैसा
पावतीहर आवेदन की
धीरजयह कई दफ़्तरों का काम है

इस पन्ने में क्या है

  1. यह नाम किसका है
  2. हर कागज़ पर अलग क्यों लिखा है
  3. अक्सर शपथ पत्र से काम बन जाता है
  4. गजट यहाँ क्यों नहीं चलता
  5. पहले सूची बनाइए
  6. पिता नहीं रहे तो
  7. केंद्रीय गजट: पूरी प्रक्रिया और फाइल के प्रारूप
  8. हम कहाँ सेवा देते हैं
  9. कुछ शब्द जो बार-बार मिलेंगे
  10. इससे जुड़े पन्ने
  11. हमारा दफ़्तर क्यों
  12. आम सवाल

यह नाम किसका है

एक बात जो पूरा रास्ता बदल देती है: आपकी मार्कशीट पर आपका नाम है -> यह आपका रिकॉर्ड है उसी मार्कशीट पर पिता का नाम भी है -> यह उनका ब्योरा है, आपके कागज़ पर फ़र्क़ यह है कि जब आप अपना नाम सुधरवाते हैं, तो आपके अपने पुराने कागज़ सबूत बनते हैं। जब पिता का नाम सुधरवाते हैं, तो आपके कागज़ कुछ साबित नहीं करते। वे तो वही गलत नाम दोहरा रहे हैं। सबूत उनके पास से आना है। इसीलिए पहला काम यह नहीं है कि दफ़्तर जाइए। पहला काम यह है कि उनके कागज़ ढूँढिए।

यही बात माता के नाम पर भी लागू होती है, और वह हमारे माता के नाम वाले पन्ने पर है।

हर कागज़ पर अलग क्यों लिखा है

क्यों होता हैउदाहरण
अलग समय, अलग लिपिकराम कुमार, रामकुमार
हिंदी से अंग्रेज़ी में लिखते समयRam Kumar, Ram Kumaar
उपनाम कभी लिखा, कभी नहींराम कुमार सिंह, राम कुमार
ख़ुद उन्होंने ही अलग लिखाआर. के. सिंह, रामकुमार सिंह
सम्मान सूचक जोड़ दियाश्री राम कुमार
यह किसी की गलती नहीं है। आपके कागज़ अलग-अलग बरसों में, अलग-अलग दफ़्तरों में, अलग-अलग लोगों ने भरे। हर बार किसी ने सुनकर या देखकर लिखा। और उस पीढ़ी के बहुत से लोगों ने ख़ुद भी अपना नाम कहीं पूरा, कहीं छोटा लिखा। इसलिए सवाल यह नहीं है कि किसने गलती की। सवाल यह है: इन सब रूपों को एक साथ जोड़ने वाला कागज़ कौन सा है? और उसका जवाब अक्सर एक शपथ पत्र होता है, पाँच अलग-अलग सुधार नहीं।

अक्सर शपथ पत्र से काम बन जाता है

पूरा प्रारूप और कहाँ-कहाँ चलता है, यह हमारे वर्तनी मेल न खाने वाले पन्ने पर है।

गजट यहाँ क्यों नहीं चलता

गजट में जो अधिसूचना छपती है, वह कहती है: "मैंने अपना नाम बदला है" आप अपने पिता का नाम नहीं बदल सकते। वह उनका नाम है। और आप उनकी ओर से गजट भी नहीं करा सकते, क्योंकि गजट अपने ही नाम के लिए होता है। तो फिर क्या होता है: अगर उनका नाम कागज़ पर गलत दर्ज है -> उसी दफ़्तर में सुधार अगर अलग-अलग रूपों में लिखा है -> एक ही व्यक्ति का शपथ पत्र अगर उन्होंने ख़ुद अपना नाम बदला है -> तब गजट उनके नाम से, उनका अपना यह फ़र्क़ बहुत लोग नहीं जानते, और बेवजह गजट करा लेते हैं जो इस काम में लगता ही नहीं।

गजट कब चाहिए और कब नहीं, यह हमारे गजट वाले पन्ने पर है।

पहले सूची बनाइए

  1. अपने सारे कागज़ निकालिए

    अंकतालिका, जन्म प्रमाण पत्र, आधार, पैन, राशन कार्ड, नौकरी के कागज़।

  2. हर एक पर पिता का नाम जैसा लिखा है, वैसा उतारिए

    अक्षर दर अक्षर, बिना सुधारे। यही असली तस्वीर है।

  3. देखिए कितने अलग रूप बने

    अक्सर दो या तीन ही निकलते हैं, पाँच नहीं जितना लगता था।

  4. तय कीजिए कौन सा सही है

    पिता के अपने कागज़ देखकर, आपके नहीं।

  5. फिर देखिए कि काम कहाँ अटका है

    अक्सर सिर्फ़ एक जगह अटका होता है, और वहीं का हल काफ़ी है।

  6. वहीं पूछिए कि उन्हें क्या चाहिए

    शपथ पत्र या सुधार, यह वे बताएँगे। बाकी जगह हाथ मत लगाइए।

अंतिम कदम सबसे ज़रूरी है। लोग एक जगह अटकने पर सारे कागज़ सुधरवाने निकल पड़ते हैं, जो महीनों और हज़ारों रुपये ले जाता है।

पिता नहीं रहे तो

यह स्थिति दुर्लभ नहीं है और इसका हल है। बस उसमें थोड़ा ज़्यादा धीरज लगता है।

केंद्रीय गजट: पूरी प्रक्रिया और फाइल के प्रारूप

ध्यान दीजिए: यह हिस्सा तब काम आता है जब आपका अपना नाम बदल रहा हो। पिता के नाम के सुधार के लिए गजट नहीं लगता, इसलिए इसे केवल तभी पढ़िए जब दोनों काम एक साथ करने हों।

चरण 1: शपथ पत्र

AFFIDAVIT (on non-judicial stamp paper, notarised) I, ____________________ S/O ____________________ , R/o ____________________________________________________ , District ____________________ , Uttar Pradesh, do hereby solemnly affirm and declare as under:- 1- That my father's name is recorded as ____________________ in my High School marksheet, Roll No. ____________________ . 2- That my father's name is also recorded as ____________________ in ____________________ , and as ____________________ in ____________________ . 3- That all the said names refer to one and the same person, that is, my father ____________________ , and that the correct name is ____________________ . 4- That it is my true and correct statement. DEPONENT VERIFICATION:- Verified at ____________ on this __-__-20__ that the contents of the above Affidavit are true and correct to the best of my knowledge and belief. DEPONENT

हिंदी में समझिए: यह प्रारूप बाकी पन्नों से अलग है। यहाँ बिंदु दो में हर वह कागज़ लिखा जाता है जिस पर नाम अलग है, और बिंदु तीन में साफ़ कहा जाता है कि ये सब एक ही व्यक्ति हैं तथा सही नाम कौन सा है। यही वह कागज़ है जो पाँच अलग सुधारों की जगह ले लेता है।

चरण 2: सार्वजनिक सूचना, दो प्रतियों में

PUBLIC NOTICE (TWO identical typed copies, each signed and witnessed) It is for general information that I, ____________________ S/O ____________________ , R/o ______________________________ ____________________________________ , declare that I have changed my name from ____________________ to ____________________ and I shall hereafter be known as ____________________ for all purposes. It is certified that I have complied with other legal requirements in this connection. ____________________ Signature of Applicant WITNESS NO. 1 Signature :- ____________________ Full Name :- ____________________ Address :- ____________________ WITNESS NO. 2 Signature :- ____________________ Full Name :- ____________________ Address :- ____________________

हिंदी में समझिए: यह केवल तब बनता है जब आपका अपना नाम बदल रहा हो। दो प्रतियाँ, दोनों पर दो गवाहों के दस्तखत, पूरा नाम और पता।

चरण 3: सीडी और सीडी प्रमाणपत्र

CD-CERTIFICATE I, ____________________ S/O ____________________ , R/o ____________________________________________________ , do hereby declare:- 1- That the matter in CD and hard copy is the same and I am responsible for any mismatch. 2- That I am responsible for the quality of CD. 3- That the CD is in MS-Word Format. 4- That the above statement is true and correct. Signature of Applicant ____________________ R/o ____________________

चरण 4: अख़बार, शुल्क, पत्र और भेजना

  1. दो अख़बारों में सूचना छपवाइए

    एक हिंदी दैनिक और एक अंग्रेज़ी अख़बार, पूरे पन्ने की छह प्रतियाँ।

  2. भारतकोश पर 1,100 रुपये जमा कीजिए

    ऑनलाइन, दो रसीदें प्रिंट कर लीजिए।

  3. पत्र लिखिए

    The Controller, Publication Department, Civil Line, Delhi 110054 के नाम।

  4. पूरी फाइल की नकल घर पर रखिए

    क्योंकि भेजी हुई फाइल वापस नहीं आती।

  5. ट्रैकिंग वाले कूरियर से भेजिए

    दिल्ली एक से तीन दिन।

  6. पिता के नाम का काम अलग चलता रहेगा

    वह इस फाइल का हिस्सा नहीं है।

एक जगह से शुरू कीजिए, सब जगह से नहीं

यह सलाह पैसे और महीने दोनों बचाती है। जब कहीं काम अटकता है, तो घबराहट में लोग सोचते हैं: "सारे कागज़ एक जैसे करा लेता हूँ" और फिर पाँच दफ़्तरों में पाँच आवेदन लगा देते हैं। पर सच यह है: [ ] काम एक ही जगह अटका था [ ] बाकी चार जगह किसी ने कुछ नहीं कहा [ ] और शायद कभी कहेगा भी नहीं इसलिए पहले वहीं जाइए जहाँ अटका है और पूछिए कि उन्हें क्या चाहिए। अक्सर जवाब होता है: एक शपथ पत्र। बाकी कागज़ों को अभी छोड़ दीजिए। वे बरसों से ऐसे ही चल रहे हैं।

शुल्क, समय और फाइल

शपथ पत्रस्टाम्प और नोटरी मिलाकर 100 से 500 रुपये
हर दफ़्तर का सुधार शुल्कअलग-अलग, वहीं पूछिए
बोर्ड में सुधारबोर्ड का निर्धारित शुल्क
अगर अपना गजट भी चाहिएवयस्क 1,100 रुपये
शपथ पत्र वाला रास्ताकुछ दिन
सुधार वाला रास्ताहफ़्तों से महीनों तक
हमारी सेवाबेसिक 999 रुपये से, कम्पलीट 1,999 रुपये से, अलग से

यही वजह है कि शपथ पत्र वाला रास्ता पहले आज़माना चाहिए। वह सस्ता है, तेज़ है, और अक्सर पूरा काम कर देता है।

शुरू करने से पहले जाँच लीजिए

सुधार के बाद क्या

जो कागज़ सुधर जाए उसकी नकलें करा लीजिए, और शपथ पत्र की भी कई प्रतियाँ रख लीजिए। वही शपथ पत्र आगे और जगह काम आएगा, क्योंकि यह उलझन एक बार में पूरी तरह खत्म कम ही होती है।

जो दूसरी वेबसाइटें गलत बताती हैं

हम कहाँ सेवा देते हैं

उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में। यह काम अक्सर कई दफ़्तरों में फैला होता है, इसलिए क्रम बनाना सबसे ज़रूरी है:

मध्यलखनऊ, कानपुर, उन्नाव, हरदोई, सीतापुर, रायबरेली, बाराबंकी
पश्चिमनोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, आगरा, अलीगढ़, मथुरा, मुरादाबाद, सहारनपुर
पूर्ववाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, आजमगढ़, जौनपुर, बलिया, देवरिया, गाज़ीपुर
बुंदेलखंडझाँसी, बाँदा, महोबा, हमीरपुर, चित्रकूट, जालौन
रुहेलखंडबरेली, शाहजहाँपुर, पीलीभीत, बदायूँ, रामपुर, बिजनौर, अमरोहा

कागज़ों की फोटो व्हाट्सएप पर भेज दीजिए, हम सूची बनाकर बता देंगे कि सुधार कहाँ चाहिए और कहाँ शपथ पत्र काफ़ी है। हमारा चैंबर Chamber No. 19, Sadar Tehsil, Sector 5, Gomti Nagar Vistar, Lucknow 226010 में है। फ़ोन 9540003316 या व्हाट्सएप 9540005002

कुछ शब्द जो बार-बार मिलेंगे

एक ही व्यक्ति का शपथ पत्र
वह शपथ पत्र जो कहता है कि नाम के अलग-अलग रूप एक ही आदमी के हैं। इस मामले में सबसे काम का कागज़।
वर्तनी का अंतर
जब नाम वही है पर लिखने का तरीका अलग है, जैसे राम कुमार और रामकुमार। यह गलती नहीं मानी जाती।
नाम सुधार
जब नाम सचमुच गलत दर्ज है। यह उसी दफ़्तर में होता है जिसने कागज़ जारी किया।
जारी करने वाला दफ़्तर
वह निकाय या बोर्ड जिसने कागज़ बनाया। सुधार वहीं होता है, कहीं और नहीं।
गजट
अपने ही नाम के परिवर्तन के लिए। किसी और के नाम के लिए यह काम नहीं आता।
पावती
आवेदन जमा करने की रसीद, जो आगे पूछताछ का आधार बनती है।

आगे जो भी काम हो, उसके लिए यहाँ एक पन्ना है:

हम पहले सूची क्यों बनवाते हैं

पिता के नाम वाले मामलों में हमारा पहला काम कोई आवेदन बनाना नहीं होता। हम कहते हैं कि सारे कागज़ निकालिए और हर एक पर जो लिखा है वह अक्षर दर अक्षर उतार दीजिए। ज़्यादातर लोग यह करके ख़ुद हैरान होते हैं, क्योंकि जितने अलग नाम उन्हें लगते थे उतने निकलते ही नहीं, अक्सर दो या तीन ही होते हैं। फिर हम पूछते हैं कि काम असल में कहाँ अटका है, क्योंकि सिर्फ़ वहीं का हल चाहिए, सब जगह का नहीं। और अगर एक शपथ पत्र से काम बनता दिखे तो हम वही बताते हैं, भले उसमें हमारा काम कम हो। विपिन चौहान, बी.टेक एलएलबी, सूची से शुरू करते हैं।

Associate office at Chamber No. 19, Sadar Tehsil, Sector 5, Gomti Nagar Vistar, Lucknow 226010, serving all 75 districts of Uttar Pradesh, Monday to Saturday, 10 AM to 6:30 PM. फ़ोन 9540003316 या व्हाट्सएप 9540005002

सूची भेज दीजिए

Uttar Pradesh Name Change

Associate Office: Chamber No. 19, Sadar Tehsil, Sector 5, Gomti Nagar Vistar, Lucknow, Uttar Pradesh 226010

Head Office: Metro Pillar 337, Hardev Nagar, Street 1, Shop No 1 (Shri Sham Documentation)

फ़ोन: 9540003316

व्हाट्सएप: 9540005002

ईमेल: info@uttarpradeshnamechange.com

समय: सोमवार से शनिवार, सुबह 10 से शाम 6:30 बजे

हर कागज़ पर पिता का नाम जैसा लिखा है, वैसा लिखकर भेज दीजिए, और बता दीजिए कि काम कहाँ अटका है।

कॉल और नाम परिवर्तन प्रारूप पाइए

फ़ॉर्म खुल रहा है...

बेकार कॉल नहींसरकारी शुल्क और हमारी फ़ीस अलग-अलग

आम सवाल

क्या गजट से पिता का नाम सुधर जाएगा?

नहीं। गजट अपने ही नाम के परिवर्तन के लिए होता है, और यह नाम आपका नहीं है।

तो सबूत क्या दूँ?

पिता के अपने कागज़। आपके कागज़ तो वही नाम दोहरा रहे हैं जो आप बदलवाना चाहते हैं।

हर कागज़ पर अलग लिखा है, क्या करूँ?

पहले सूची बनाइए। अक्सर दो या तीन ही रूप निकलते हैं, और एक शपथ पत्र से काम बन जाता है।

शपथ पत्र में क्या लिखा जाता है?

हर वह कागज़ जिस पर नाम अलग है, और यह कि ये सब एक ही व्यक्ति हैं तथा सही नाम कौन सा है।

क्या हर दफ़्तर शपथ पत्र मान लेता है?

ज़्यादातर मान लेते हैं, ख़ासकर वर्तनी वाले अंतर में। पर जहाँ काम अटका है वहाँ पहले पूछ लीजिए।

क्या सारे कागज़ एक साथ सुधरवा लूँ?

नहीं। पहले वहीं देखिए जहाँ अटका है। बाकी कागज़ बरसों से ऐसे ही चल रहे हैं।

वर्तनी अलग होना गलती है?

आम तौर पर नहीं। अलग समय, अलग लिपिक और हिंदी से अंग्रेज़ी में लिखने से यह होता है।

पिता नहीं रहे, अब क्या?

उनके बचे हुए कागज़ और मृत्यु प्रमाण पत्र सबूत बनते हैं, और शपथ पत्र आप दे सकते हैं।

उनके पास कोई कागज़ ही नहीं था।

पुरानी पीढ़ी में यह आम है। तब शपथ पत्र वाला रास्ता ही बचता है, और दफ़्तर आम तौर पर समझते हैं।

मार्कशीट में पिता का नाम गलत है।

वह बोर्ड में सुधरता है, उसी रास्ते जिससे आपका अपना नाम सुधरता है, यानी स्कूल के ज़रिए।

माता के नाम का भी यही नियम है?

हाँ, बिल्कुल वही। नाम किसी और का है, इसलिए सबूत भी उन्हीं का चाहिए।

कितना समय लगता है?

शपथ पत्र वाला रास्ता कुछ दिन का है। सुधार वाला रास्ता हफ़्तों से महीनों तक जा सकता है।

आधिकारिक स्रोत

यहाँ दी गई बातें इन स्रोतों और हमारे अपने काम से जाँची गई हैं। हर दफ़्तर की माँग अलग हो सकती है, इसलिए जहाँ काम अटका है वहीं पूछकर आगे बढ़िए।

संस्थापक के बारे में: विपिन चौहान, बी.टेक एलएलबी, ने यह दफ़्तर शुरू किया। प्रकाशन विभाग में सीधे फाइल लगाने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव। यहाँ लिखी हर बात उन फाइलों से आई है जो हमने खुद बनाईं और प्रकाशन तक पहुँचाईं, किसी और वेबसाइट से नकल करके नहीं।

संक्षेप में

इस मामले में एक बात पूरा रास्ता बदल देती है: यह नाम आपका है ही नहीं। वह आपके कागज़ पर लिखा है, पर बताता किसी और को है। इसलिए जब आप अपना नाम सुधरवाते हैं तो आपके पुराने कागज़ सबूत बनते हैं, पर यहाँ वे कुछ साबित नहीं करते, क्योंकि वे तो वही नाम दोहरा रहे हैं। सबूत पिता के अपने कागज़ों से आना है। दूसरी बात यह कि हर कागज़ पर नाम अलग होना किसी की गलती नहीं है। वे अलग बरसों में, अलग दफ़्तरों में, अलग लोगों ने भरे थे, और उस पीढ़ी के बहुत से लोगों ने ख़ुद भी अपना नाम कहीं पूरा और कहीं छोटा लिखा। इसलिए असली सवाल यह नहीं कि किसने गलती की, बल्कि यह कि इन सब रूपों को जोड़ने वाला कागज़ कौन सा है। और उसका जवाब अक्सर एक शपथ पत्र होता है, पाँच अलग-अलग सुधार नहीं।

कहाँ-कहाँ अलग लिखा है?

सूची बना दीजिए, हर कागज़ पर जैसा लिखा है वैसा। उसी से तय होता है कि सुधार चाहिए या नहीं।

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