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रास्ता स्कूल से जाता है।

यूपी बोर्ड मार्कशीट में नाम सुधार कैसे कराएँ

मार्कशीट पर नाम गलत छपा है और कहीं काम अटक रहा है। दो बातें पहले जान लीजिए, क्योंकि यहीं सबसे ज़्यादा समय बर्बाद होता है। पहली, आप सीधे बोर्ड को आवेदन नहीं कर सकते, आवेदन आपके स्कूल के ज़रिए जाता है। दूसरी, गजट यहाँ काम नहीं आता, क्योंकि मार्कशीट उस समय का रिकॉर्ड है, आज के नाम का कागज़ नहीं।

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स्कूल के ज़रिए आवेदन गजट यहाँ नहीं चलता सबूत उसी समय का चाहिए स्कूल न माने तो DIOS

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छोटा जवाब: आवेदन आपके स्कूल के ज़रिए बोर्ड तक जाता है, सीधे आपके हाथ से नहीं। इसलिए पहला काम बोर्ड नहीं, स्कूल है, और साथ ले जाना है वह सबूत जो उसी समय का हो जब आपने पढ़ाई की थी। गजट यहाँ काम नहीं आता, क्योंकि मार्कशीट आज के नाम का कागज़ नहीं, उस समय का रिकॉर्ड है। स्कूल आगे न भेजे तो DIOS के पास जाइए।

ज़्यादातर लोग सीधे बोर्ड की वेबसाइट खोलकर बैठ जाते हैं। असली काम वहाँ है ही नहीं।

यूपी बोर्ड मार्कशीट में नाम सुधार
सबूत घर में है, पोर्टल में नहीं।

एक नज़र में

आवेदन कौन भेजता हैआपका स्कूल, आपके ज़रिए नहीं
पहला कामस्कूल जाना, बोर्ड नहीं
सबूत कैसा चाहिएउसी समय का, बाद का नहीं
सबसे मज़बूत सबूतस्कूल का स्कॉलर रजिस्टर
क्या गजट चलता हैनहीं, यह सुधार है, परिवर्तन नहीं
स्कूल मना करे तोDIOS, लिखित में
स्कूल बंद हो गया होतब भी रास्ता DIOS से है
ऑनलाइन क्या हैआवेदन और स्थिति, फ़ैसला नहीं

मुख्य बातें

ज़रूरी कागज़: Quick Facts

मूल मार्कशीटहाईस्कूल या इंटर की
अनुक्रमांक और वर्षजिससे रिकॉर्ड मिलता है
स्कॉलर रजिस्टर की नकलसबसे मज़बूत सबूत
स्थानांतरण प्रमाण पत्रअगर मिल जाए
जन्म प्रमाण पत्रउसी समय का बना हुआ
पिछली कक्षाओं के कागज़जो सही नाम दिखाते हों
शपथ पत्रनोटरी किया हुआ
आवेदन की रसीदजो भी स्कूल दे, माँगकर लीजिए

इस पन्ने में क्या है

  1. रास्ता स्कूल से जाता है
  2. गजट यहाँ क्यों नहीं चलता
  3. सबूत उसी समय का चाहिए
  4. स्कूल मना कर दे तो
  5. स्कूल ही बंद हो गया हो तो
  6. ऑनलाइन क्या है और क्या नहीं
  7. केंद्रीय गजट: पूरी प्रक्रिया और फाइल के प्रारूप
  8. हम कहाँ सेवा देते हैं
  9. कुछ शब्द जो बार-बार मिलेंगे
  10. इससे जुड़े पन्ने
  11. हमारा दफ़्तर क्यों
  12. आम सवाल

रास्ता स्कूल से जाता है

लोग जो सोचते हैं: मैं -> बोर्ड जो असल में होता है: मैं -> स्कूल -> बोर्ड यही एक पंक्ति सबसे ज़्यादा समय बचाती है। बोर्ड के पास आपका जो रिकॉर्ड है, वह स्कूल ने भेजा था। इसलिए उसे सुधारने की सिफ़ारिश भी स्कूल से ही आती है। इसका मतलब यह है कि आपको जिसे राज़ी करना है, वह बोर्ड का कोई अफ़सर नहीं है। वह आपके पुराने स्कूल का लिपिक है, जिसके लिए यह काम ज़रूरी नहीं है और जो शायद आपको जानता भी नहीं। इसलिए वहाँ पूरी तैयारी के साथ जाइए, खाली हाथ नहीं।

पहली मुलाक़ात में ही सारे कागज़ ले जाइए। बार-बार जाना पड़े तो हर बार काम नए सिरे से शुरू होता है।

गजट यहाँ क्यों नहीं चलता

गजट क्या करता हैमार्कशीट क्या है
आज से आगे का नाम तय करता हैउस समय का रिकॉर्ड है
यह एक परिवर्तन हैयहाँ सुधार चाहिए
पूरे देश में लागू होता हैयह एक पुरानी प्रविष्टि है
भविष्य के कागज़ों के लिएबीते हुए वर्ष का दस्तावेज़
बहुत से लोग पहले गजट करा लेते हैं, यह सोचकर कि अब मार्कशीट अपने आप बदल जाएगी। नहीं बदलती। क्योंकि बोर्ड यह नहीं पूछ रहा कि आपका नाम आज क्या है। वह यह पूछ रहा है कि 2011 में, जब आपने परीक्षा दी थी, तब क्या था। उसका जवाब गजट में नहीं है। वह उस ज़माने के कागज़ों में है। इसलिए क्रम उलटा मत कीजिए: पहले देखिए कि यह सुधार है या परिवर्तन सुधार है -> स्कूल और बोर्ड, गजट नहीं परिवर्तन है -> गजट, और उससे आगे के कागज़ अगर आपका नाम सचमुच बदला है, तब भी मार्कशीट पुराने नाम में ही रहेगी, और वह गलत नहीं है।

यह फ़ैसला विस्तार से हमारे मार्कशीट सुधार बनाम गजट पन्ने पर समझाया गया है।

सबूत उसी समय का चाहिए

सोचिए बोर्ड के सामने क्या रखा है: एक पुरानी प्रविष्टि, जो स्कूल ने भेजी थी और आप कह रहे हैं कि वह गलत है। तो सवाल यही बनता है: उस वक़्त सही क्या था, और वह कहाँ लिखा है? इसका जवाब आज के किसी कागज़ में नहीं मिलेगा। वह मिलेगा: स्कूल के रजिस्टर में पुरानी कक्षाओं के कागज़ों में उस दौर के प्रमाण पत्रों में इसलिए घर के पुराने कागज़ ढूँढना, पोर्टल खोलने से पहले का काम है।

स्कूल मना कर दे तो

  1. पहले लिखित में आवेदन दीजिए

    ज़बानी बात का कोई रिकॉर्ड नहीं बनता। रसीद या पावती माँगिए, चाहे वह सिर्फ़ हस्ताक्षर हो।

  2. तारीख़ लिख लीजिए

    कब दिया, किसे दिया, उसने क्या कहा। यही आगे काम आएगा।

  3. उचित समय दीजिए

    दो दिन में शिकायत करने से कुछ नहीं होता। स्कूल को काम करने का मौका दीजिए।

  4. फिर DIOS के पास जाइए

    जिला विद्यालय निरीक्षक, जो स्कूलों के ऊपर बैठते हैं। शिकायत लिखित में और तारीख़ों के साथ।

  5. अपना आवेदन और पावती साथ लगाइए

    ताकि पूरी कहानी बिना समझाए दिख जाए।

  6. शिकायत में शिकायत मत लिखिए

    लिखिए कि क्या रुका है और कब से। नाराज़गी नहीं, तारीख़ें।

इसका पूरा तरीका हमारे स्कूल आगे न भेजे तो पन्ने पर है।

स्कूल ही बंद हो गया हो तो

बहुत पुराने मामलों का हिस्सा हमारे कई साल बाद सुधार पन्ने पर है।

ऑनलाइन क्या है और क्या नहीं

ऑनलाइन जो है: आवेदन भरना स्थिति देखना शुल्क जमा करना ऑनलाइन जो नहीं है: स्कूल की सिफ़ारिश रजिस्टर से मिलान असली फ़ैसला इसलिए पोर्टल पर आवेदन भर देने से यह मत समझिए कि काम शुरू हो गया। काम तब शुरू होता है जब स्कूल उसे आगे बढ़ाता है। पोर्टल एक खिड़की है, दरवाज़ा नहीं।

यह ग़लतफ़हमी सबसे ज़्यादा नुक़सान करती है, क्योंकि लोग महीनों स्थिति देखते रहते हैं जबकि फाइल स्कूल में ही पड़ी होती है।

केंद्रीय गजट: पूरी प्रक्रिया और फाइल के प्रारूप

ध्यान दीजिए: यह हिस्सा तब काम आता है जब आपका नाम सचमुच बदला है, मार्कशीट सुधार के लिए नहीं। दोनों अलग काम हैं और अक्सर एक साथ नहीं चाहिए होते।

चरण 1: शपथ पत्र

AFFIDAVIT (on non-judicial stamp paper, notarised) I, ____________________ S/O ____________________ , R/o ____________________________________________________ , District ____________________ , Uttar Pradesh, do hereby solemnly affirm and declare as under:- 1- That my name is recorded as ____________________ in my High School marksheet, Roll No. ____________________ , issued by ____________________ Board in the year ______ . 2- That I have changed my name from ____________________ to ____________________ and I shall hereafter be known as ____________________ for all purposes. 3- That both the said names are the name of one and the same person, that is, myself. 4- That it is my true and correct statement. DEPONENT VERIFICATION:- Verified at ____________ on this __-__-20__ that the contents of the above Affidavit are true and correct to the best of my knowledge and belief. DEPONENT

हिंदी में समझिए: बिंदु एक में वही नाम लिखिए जो मार्कशीट पर छपा है, चाहे वह गलत ही हो, साथ में अनुक्रमांक, बोर्ड और वर्ष। यही तीन चीज़ें आपके रिकॉर्ड को खोजती हैं। बिंदु दो में पुराना और नया नाम।

चरण 2: सार्वजनिक सूचना, दो प्रतियों में

PUBLIC NOTICE (TWO identical typed copies, each signed and witnessed) It is for general information that I, ____________________ S/O ____________________ , R/o ______________________________ ____________________________________ , declare that I have changed my name from ____________________ to ____________________ and I shall hereafter be known as ____________________ for all purposes. It is certified that I have complied with other legal requirements in this connection. ____________________ Signature of Applicant WITNESS NO. 1 Signature :- ____________________ Full Name :- ____________________ Address :- ____________________ WITNESS NO. 2 Signature :- ____________________ Full Name :- ____________________ Address :- ____________________

हिंदी में समझिए: यह कागज़ दो बार टाइप होगा, बिल्कुल एक जैसा, और दोनों पर दो गवाहों के दस्तखत, पूरा नाम और पता।

चरण 3: सीडी और सीडी प्रमाणपत्र

CD-CERTIFICATE I, ____________________ S/O ____________________ , R/o ____________________________________________________ , do hereby declare:- 1- That the matter in CD and hard copy is the same and I am responsible for any mismatch. 2- That I am responsible for the quality of CD. 3- That the CD is in MS-Word Format. 4- That the above statement is true and correct. Signature of Applicant ____________________ R/o ____________________

हिंदी में समझिए: सार्वजनिक सूचना का वही मजमून सीडी में एमएस वर्ड फाइल के रूप में जाता है। एक अक्षर का फ़र्क़ भी फाइल वापस करा देता है।

चरण 4: अख़बार, शुल्क, पत्र और भेजना

  1. दो अख़बारों में सूचना छपवाइए

    अपने जिले का एक हिंदी दैनिक और एक अंग्रेज़ी अख़बार, पूरे पन्ने की छह प्रतियाँ।

  2. भारतकोश पर 1,100 रुपये जमा कीजिए

    ऑनलाइन, और दो रसीदें प्रिंट कर लीजिए।

  3. पत्र लिखिए

    The Controller, Publication Department, Civil Line, Delhi 110054 के नाम।

  4. पूरी फाइल की नकल घर पर रखिए

    क्योंकि भेजी हुई फाइल वापस नहीं आती।

  5. ट्रैकिंग वाले कूरियर से भेजिए

    दिल्ली एक से तीन दिन।

  6. फिर आधार और आगे के कागज़

    मार्कशीट इसमें शामिल नहीं है, वह अपने अलग रास्ते चलती है।

पोर्टल से पहले घर के कागज़

एक दोपहर, घर पर, पोर्टल खोलने से पहले। ढूँढिए: [ ] मूल मार्कशीट, दोनों कक्षाओं की [ ] स्थानांतरण प्रमाण पत्र [ ] पिछली कक्षाओं के कागज़ [ ] उस समय का जन्म प्रमाण पत्र [ ] दाखिले से जुड़ा कोई भी कागज़ [ ] पुरानी तस्वीर वाले पहचान पत्र ये चीज़ें अक्सर उसी संदूक में मिलती हैं जिसमें ज़मीन के कागज़ रहते हैं, या दादा-दादी के घर। जो मिल जाए, उसकी फोटो खींच लीजिए और एक जगह रख लीजिए। पोर्टल आपसे अनुक्रमांक माँगेगा। स्कूल आपसे सबूत माँगेगा। सबूत घर में है, पोर्टल में नहीं।

शुल्क, समय और फाइल

बोर्ड का सुधार शुल्कनिर्धारित शुल्क, पोर्टल पर देखिए
शपथ पत्रस्टाम्प और नोटरी मिलाकर 100 से 500 रुपये
अगर गजट भी चाहिएवयस्क 1,100 रुपये
अख़बारहर अख़बार के कुछ सौ रुपये
बोर्ड सुधार में समयमहीनों, स्कूल की गति पर निर्भर
गजट में समयलगभग 25 से 45 दिन
हमारी सेवाबेसिक 999 रुपये से, कम्पलीट 1,999 रुपये से, अलग से

शुल्क और प्रक्रिया समय-समय पर बदलते हैं, इसलिए आवेदन से पहले बोर्ड के पोर्टल पर मौजूदा नियम देख लीजिए।

स्कूल जाने से पहले जाँच लीजिए

सुधार के बाद क्या

सुधरी हुई मार्कशीट मिलने पर उसकी कई नकलें करा लीजिए और मूल को संभालकर रखिए। यही कागज़ आगे आधार, पैन, पासपोर्ट और नौकरी की जाँच, सब जगह आधार बनता है।

जो दूसरी वेबसाइटें गलत बताती हैं

हम कहाँ सेवा देते हैं

उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में। बोर्ड का काम हर जिले में एक जैसा चलता है, बस स्कूल और DIOS आपके अपने जिले के होते हैं:

मध्यलखनऊ, कानपुर, उन्नाव, हरदोई, सीतापुर, रायबरेली, बाराबंकी
पश्चिमनोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, आगरा, अलीगढ़, मथुरा, मुरादाबाद, सहारनपुर
पूर्ववाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, आजमगढ़, जौनपुर, बलिया, देवरिया, गाज़ीपुर
बुंदेलखंडझाँसी, बाँदा, महोबा, हमीरपुर, चित्रकूट, जालौन
रुहेलखंडबरेली, शाहजहाँपुर, पीलीभीत, बदायूँ, रामपुर, बिजनौर, अमरोहा

स्कूल और DIOS का काम आपको या घर के किसी सदस्य को करना होता है, क्योंकि वहाँ आपका जाना ज़रूरी है। बाकी कागज़ी तैयारी हम कर देते हैं। हमारा चैंबर Chamber No. 19, Sadar Tehsil, Sector 5, Gomti Nagar Vistar, Lucknow 226010 में है। फ़ोन 9540003316 या व्हाट्सएप 9540005002

कुछ शब्द जो बार-बार मिलेंगे

स्कॉलर रजिस्टर
स्कूल का वह रजिस्टर जिसमें दाखिले के समय छात्र का नाम और ब्योरा दर्ज होता है। नाम सुधार में यही सबसे मज़बूत सबूत है।
DIOS
जिला विद्यालय निरीक्षक, जो जिले के विद्यालयों के ऊपर बैठते हैं। स्कूल आगे न भेजे तो शिकायत यहीं जाती है।
नाम सुधार
जब रिकॉर्ड में नाम वही होना था पर गलत दर्ज हो गया। इसमें गजट की ज़रूरत नहीं पड़ती।
नाम परिवर्तन
जब आप सचमुच नया नाम रख रहे हैं। इसमें गजट लगता है, पर पुरानी मार्कशीट पुराने नाम में ही रहती है।
अनुक्रमांक
परीक्षा का रोल नंबर, जिससे बोर्ड और स्कूल दोनों आपका रिकॉर्ड खोजते हैं।
पावती
आवेदन जमा करने की रसीद या हस्ताक्षर। आगे शिकायत करनी हो तो यही आधार बनती है।

आगे जो भी काम हो, उसके लिए यहाँ एक पन्ना है:

हम पहले यह क्यों पूछते हैं कि सबूत कौन सा है

मार्कशीट के मामले में हमारा पहला सवाल यह नहीं होता कि नाम क्या होना चाहिए। हम पूछते हैं कि उस समय का कोई कागज़ है या नहीं, क्योंकि उसी पर पूरा मामला टिकता है। जिनके पास सिर्फ़ आज का आधार होता है, उन्हें हम साफ़ बता देते हैं कि पहले पुराने कागज़ ढूँढिए, वरना स्कूल के चक्कर बेकार जाएँगे। और अगर कोई पहले ही गजट करा चुका है यह सोचकर कि मार्कशीट बदल जाएगी, तो वह भी हम सीधे बता देते हैं, भले सुनने में अच्छा न लगे। विपिन चौहान, बी.टेक एलएलबी, यही सवाल पहले पूछते हैं।

Associate office at Chamber No. 19, Sadar Tehsil, Sector 5, Gomti Nagar Vistar, Lucknow 226010, serving all 75 districts of Uttar Pradesh, Monday to Saturday, 10 AM to 6:30 PM. फ़ोन 9540003316 या व्हाट्सएप 9540005002

मार्कशीट की फोटो भेज दीजिए

Uttar Pradesh Name Change

Associate Office: Chamber No. 19, Sadar Tehsil, Sector 5, Gomti Nagar Vistar, Lucknow, Uttar Pradesh 226010

Head Office: Metro Pillar 337, Hardev Nagar, Street 1, Shop No 1 (Shri Sham Documentation)

फ़ोन: 9540003316

व्हाट्सएप: 9540005002

ईमेल: info@uttarpradeshnamechange.com

समय: सोमवार से शनिवार, सुबह 10 से शाम 6:30 बजे

मार्कशीट की फोटो भेजिए और बता दीजिए कि उस ज़माने का और कौन सा कागज़ आपके पास है। इन्हीं दो से रास्ता तय होता है।

कॉल और नाम परिवर्तन प्रारूप पाइए

फ़ॉर्म खुल रहा है...

बेकार कॉल नहींसरकारी शुल्क और हमारी फ़ीस अलग-अलग

आम सवाल

क्या मैं सीधे बोर्ड को आवेदन कर सकता हूँ?

नहीं। बोर्ड के पास आपका रिकॉर्ड स्कूल ने भेजा था, इसलिए सुधार की सिफ़ारिश भी स्कूल से ही जाती है।

मैंने गजट करा लिया है, अब मार्कशीट बदल जाएगी?

नहीं। गजट आज से आगे के लिए है। मार्कशीट उस समय का रिकॉर्ड है, और बोर्ड यह पूछता है कि तब क्या सही था।

तो गजट बेकार गया?

नहीं, वह आधार, पैन, बैंक और पासपोर्ट में काम आएगा। बस मार्कशीट उसका हिस्सा नहीं है।

सबसे मज़बूत सबूत क्या है?

स्कूल का स्कॉलर रजिस्टर, क्योंकि वह दाखिले के समय भरा गया था और वहीं रखा है।

क्या आधार दिखाने से काम चलेगा?

अकेले नहीं। बोर्ड को उस ज़माने का सबूत चाहिए, आज बना कागज़ नहीं।

स्कूल आगे नहीं भेज रहा।

पहले लिखित आवेदन दीजिए और पावती लीजिए, उचित समय दीजिए, फिर DIOS के पास तारीख़ों के साथ शिकायत कीजिए।

शिकायत में क्या लिखूँ?

क्या रुका है और कब से। नाराज़गी नहीं, तारीख़ें, और अपना आवेदन तथा पावती साथ लगाइए।

मेरा स्कूल बंद हो चुका है।

यह असामान्य नहीं है। ऐसे मामलों में रास्ता DIOS के दफ़्तर से जाता है, और उसमें समय लगता है।

ऑनलाइन आवेदन भर दिया, अब क्या करूँ?

स्कूल जाइए। पोर्टल एक खिड़की है, दरवाज़ा नहीं, और फाइल तब चलती है जब स्कूल उसे आगे बढ़ाता है।

कितना समय लगता है?

महीनों, और यह काफ़ी हद तक इस पर निर्भर है कि स्कूल कितनी जल्दी आगे भेजता है।

पिता का नाम भी गलत है।

वह भी इसी रास्ते सुधरता है, बस प्रविष्टि अलग होती है। दोनों एक साथ बताना बेहतर रहता है।

सुधार के बाद क्या करूँ?

कई नकलें करा लीजिए और मूल संभालकर रखिए, क्योंकि यही कागज़ आगे हर जगह आधार बनता है।

आधिकारिक स्रोत

यहाँ दी गई बातें इन स्रोतों और हमारे अपने काम से जाँची गई हैं। बोर्ड की प्रक्रिया, शुल्क और समय सीमाएँ बदलती रहती हैं, इसलिए आवेदन से पहले मौजूदा नियम पोर्टल पर या स्कूल से देख लीजिए।

संस्थापक के बारे में: विपिन चौहान, बी.टेक एलएलबी, ने यह दफ़्तर शुरू किया। प्रकाशन विभाग में सीधे फाइल लगाने का पाँच साल से ज़्यादा का अनुभव। यहाँ लिखी हर बात उन फाइलों से आई है जो हमने खुद बनाईं और प्रकाशन तक पहुँचाईं, किसी और वेबसाइट से नकल करके नहीं।

संक्षेप में

दो बातें यहाँ सबसे ज़्यादा समय बर्बाद कराती हैं। पहली, लोग सीधे बोर्ड की वेबसाइट खोलकर बैठ जाते हैं, जबकि आवेदन आपके हाथ से नहीं, आपके स्कूल के ज़रिए जाता है। बोर्ड के पास जो रिकॉर्ड है वह स्कूल ने भेजा था, इसलिए उसे सुधारने की सिफ़ारिश भी वहीं से आती है, और जिसे आपको राज़ी करना है वह बोर्ड का अफ़सर नहीं, आपके पुराने स्कूल का लिपिक है। दूसरी, बहुत से लोग पहले गजट करा लेते हैं यह सोचकर कि मार्कशीट अपने आप बदल जाएगी। नहीं बदलती, क्योंकि बोर्ड यह नहीं पूछ रहा कि आपका नाम आज क्या है, वह यह पूछ रहा है कि परीक्षा के वर्ष में क्या था। उसका जवाब गजट में नहीं, उस ज़माने के कागज़ों में है। इसलिए पोर्टल खोलने से पहले एक दोपहर घर के पुराने कागज़ ढूँढने में लगाइए। सबूत घर में है, पोर्टल में नहीं।

स्कूल आगे नहीं भेज रहा?

यह आम बात है और इसका रास्ता है। बता दीजिए स्कूल ने क्या कहा और कब कहा।

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