छोटा जवाब: आवेदन आपके स्कूल के ज़रिए बोर्ड तक जाता है, सीधे आपके हाथ से नहीं। इसलिए पहला काम बोर्ड नहीं, स्कूल है, और साथ ले जाना है वह सबूत जो उसी समय का हो जब आपने पढ़ाई की थी। गजट यहाँ काम नहीं आता, क्योंकि मार्कशीट आज के नाम का कागज़ नहीं, उस समय का रिकॉर्ड है। स्कूल आगे न भेजे तो DIOS के पास जाइए।
ज़्यादातर लोग सीधे बोर्ड की वेबसाइट खोलकर बैठ जाते हैं। असली काम वहाँ है ही नहीं।
एक नज़र में
| आवेदन कौन भेजता है | आपका स्कूल, आपके ज़रिए नहीं |
| पहला काम | स्कूल जाना, बोर्ड नहीं |
| सबूत कैसा चाहिए | उसी समय का, बाद का नहीं |
| सबसे मज़बूत सबूत | स्कूल का स्कॉलर रजिस्टर |
| क्या गजट चलता है | नहीं, यह सुधार है, परिवर्तन नहीं |
| स्कूल मना करे तो | DIOS, लिखित में |
| स्कूल बंद हो गया हो | तब भी रास्ता DIOS से है |
| ऑनलाइन क्या है | आवेदन और स्थिति, फ़ैसला नहीं |
मुख्य बातें
- बोर्ड आपसे नहीं, स्कूल से आवेदन लेता है।
- सबूत उसी ज़माने का चाहिए, आज का नहीं।
- गजट से मार्कशीट नहीं बदलती।
- स्कूल न भेजे तो DIOS के पास लिखित शिकायत।
- तारीख़ें लिखकर रखिए, बातें याद मत रखिए।
ज़रूरी कागज़: Quick Facts
| मूल मार्कशीट | हाईस्कूल या इंटर की |
| अनुक्रमांक और वर्ष | जिससे रिकॉर्ड मिलता है |
| स्कॉलर रजिस्टर की नकल | सबसे मज़बूत सबूत |
| स्थानांतरण प्रमाण पत्र | अगर मिल जाए |
| जन्म प्रमाण पत्र | उसी समय का बना हुआ |
| पिछली कक्षाओं के कागज़ | जो सही नाम दिखाते हों |
| शपथ पत्र | नोटरी किया हुआ |
| आवेदन की रसीद | जो भी स्कूल दे, माँगकर लीजिए |
इस पन्ने में क्या है
- रास्ता स्कूल से जाता है
- गजट यहाँ क्यों नहीं चलता
- सबूत उसी समय का चाहिए
- स्कूल मना कर दे तो
- स्कूल ही बंद हो गया हो तो
- ऑनलाइन क्या है और क्या नहीं
- केंद्रीय गजट: पूरी प्रक्रिया और फाइल के प्रारूप
- हम कहाँ सेवा देते हैं
- कुछ शब्द जो बार-बार मिलेंगे
- इससे जुड़े पन्ने
- हमारा दफ़्तर क्यों
- आम सवाल
रास्ता स्कूल से जाता है
पहली मुलाक़ात में ही सारे कागज़ ले जाइए। बार-बार जाना पड़े तो हर बार काम नए सिरे से शुरू होता है।
गजट यहाँ क्यों नहीं चलता
| गजट क्या करता है | मार्कशीट क्या है |
|---|---|
| आज से आगे का नाम तय करता है | उस समय का रिकॉर्ड है |
| यह एक परिवर्तन है | यहाँ सुधार चाहिए |
| पूरे देश में लागू होता है | यह एक पुरानी प्रविष्टि है |
| भविष्य के कागज़ों के लिए | बीते हुए वर्ष का दस्तावेज़ |
यह फ़ैसला विस्तार से हमारे मार्कशीट सुधार बनाम गजट पन्ने पर समझाया गया है।
सबूत उसी समय का चाहिए
- स्कूल का स्कॉलर रजिस्टर सबसे मज़बूत है, क्योंकि वह दाखिले के वक़्त भरा गया था और वहीं रखा है।
- पिछली कक्षाओं के कागज़ भी काम आते हैं, अगर उन पर सही नाम लिखा है।
- उसी ज़माने का जन्म प्रमाण पत्र अच्छा सहारा है, बाद में बनवाया हुआ उतना नहीं।
- आज बना आधार अकेले काफ़ी नहीं होता, क्योंकि वह उस वर्ष का सबूत नहीं है।
- शपथ पत्र साथ लगता है, पर वह सबूत की जगह नहीं लेता, सिर्फ़ उसे जोड़ता है।
स्कूल मना कर दे तो
पहले लिखित में आवेदन दीजिए
ज़बानी बात का कोई रिकॉर्ड नहीं बनता। रसीद या पावती माँगिए, चाहे वह सिर्फ़ हस्ताक्षर हो।
तारीख़ लिख लीजिए
कब दिया, किसे दिया, उसने क्या कहा। यही आगे काम आएगा।
उचित समय दीजिए
दो दिन में शिकायत करने से कुछ नहीं होता। स्कूल को काम करने का मौका दीजिए।
फिर DIOS के पास जाइए
जिला विद्यालय निरीक्षक, जो स्कूलों के ऊपर बैठते हैं। शिकायत लिखित में और तारीख़ों के साथ।
अपना आवेदन और पावती साथ लगाइए
ताकि पूरी कहानी बिना समझाए दिख जाए।
शिकायत में शिकायत मत लिखिए
लिखिए कि क्या रुका है और कब से। नाराज़गी नहीं, तारीख़ें।
इसका पूरा तरीका हमारे स्कूल आगे न भेजे तो पन्ने पर है।
स्कूल ही बंद हो गया हो तो
- यह असामान्य नहीं है, ख़ासकर पुराने और निजी विद्यालयों के मामले में।
- ऐसे में रास्ता DIOS के दफ़्तर से जाता है, क्योंकि बंद स्कूलों के रिकॉर्ड की व्यवस्था वहीं देखी जाती है।
- अपने पास जो भी है वह जोड़िए, मार्कशीट, स्थानांतरण प्रमाण पत्र, पुरानी कक्षाओं के कागज़।
- यह लंबा रास्ता है, पर बंद नहीं है, और इसमें धीरज सबसे काम की चीज़ है।
- मौजूदा व्यवस्था दफ़्तर से पूछकर तय कीजिए, क्योंकि नियम समय-समय पर बदलते हैं।
बहुत पुराने मामलों का हिस्सा हमारे कई साल बाद सुधार पन्ने पर है।
ऑनलाइन क्या है और क्या नहीं
यह ग़लतफ़हमी सबसे ज़्यादा नुक़सान करती है, क्योंकि लोग महीनों स्थिति देखते रहते हैं जबकि फाइल स्कूल में ही पड़ी होती है।
केंद्रीय गजट: पूरी प्रक्रिया और फाइल के प्रारूप
ध्यान दीजिए: यह हिस्सा तब काम आता है जब आपका नाम सचमुच बदला है, मार्कशीट सुधार के लिए नहीं। दोनों अलग काम हैं और अक्सर एक साथ नहीं चाहिए होते।
चरण 1: शपथ पत्र
हिंदी में समझिए: बिंदु एक में वही नाम लिखिए जो मार्कशीट पर छपा है, चाहे वह गलत ही हो, साथ में अनुक्रमांक, बोर्ड और वर्ष। यही तीन चीज़ें आपके रिकॉर्ड को खोजती हैं। बिंदु दो में पुराना और नया नाम।
चरण 2: सार्वजनिक सूचना, दो प्रतियों में
हिंदी में समझिए: यह कागज़ दो बार टाइप होगा, बिल्कुल एक जैसा, और दोनों पर दो गवाहों के दस्तखत, पूरा नाम और पता।
चरण 3: सीडी और सीडी प्रमाणपत्र
हिंदी में समझिए: सार्वजनिक सूचना का वही मजमून सीडी में एमएस वर्ड फाइल के रूप में जाता है। एक अक्षर का फ़र्क़ भी फाइल वापस करा देता है।
चरण 4: अख़बार, शुल्क, पत्र और भेजना
दो अख़बारों में सूचना छपवाइए
अपने जिले का एक हिंदी दैनिक और एक अंग्रेज़ी अख़बार, पूरे पन्ने की छह प्रतियाँ।
भारतकोश पर 1,100 रुपये जमा कीजिए
ऑनलाइन, और दो रसीदें प्रिंट कर लीजिए।
पत्र लिखिए
The Controller, Publication Department, Civil Line, Delhi 110054 के नाम।
पूरी फाइल की नकल घर पर रखिए
क्योंकि भेजी हुई फाइल वापस नहीं आती।
ट्रैकिंग वाले कूरियर से भेजिए
दिल्ली एक से तीन दिन।
फिर आधार और आगे के कागज़
मार्कशीट इसमें शामिल नहीं है, वह अपने अलग रास्ते चलती है।
पोर्टल से पहले घर के कागज़
शुल्क, समय और फाइल
| बोर्ड का सुधार शुल्क | निर्धारित शुल्क, पोर्टल पर देखिए |
| शपथ पत्र | स्टाम्प और नोटरी मिलाकर 100 से 500 रुपये |
| अगर गजट भी चाहिए | वयस्क 1,100 रुपये |
| अख़बार | हर अख़बार के कुछ सौ रुपये |
| बोर्ड सुधार में समय | महीनों, स्कूल की गति पर निर्भर |
| गजट में समय | लगभग 25 से 45 दिन |
| हमारी सेवा | बेसिक 999 रुपये से, कम्पलीट 1,999 रुपये से, अलग से |
शुल्क और प्रक्रिया समय-समय पर बदलते हैं, इसलिए आवेदन से पहले बोर्ड के पोर्टल पर मौजूदा नियम देख लीजिए।
स्कूल जाने से पहले जाँच लीजिए
- यह सुधार है या परिवर्तन, यह तय हुआ?
- उस समय का कोई सबूत मिला, या सिर्फ़ आज के कागज़ हैं?
- अनुक्रमांक और परीक्षा वर्ष पता है?
- आवेदन लिखित में देने को तैयार हैं, ज़बानी नहीं?
सुधार के बाद क्या
सुधरी हुई मार्कशीट मिलने पर उसकी कई नकलें करा लीजिए और मूल को संभालकर रखिए। यही कागज़ आगे आधार, पैन, पासपोर्ट और नौकरी की जाँच, सब जगह आधार बनता है।
जो दूसरी वेबसाइटें गलत बताती हैं
- गलत: सीधे बोर्ड को आवेदन कीजिए। सही: आवेदन स्कूल के ज़रिए जाता है।
- गलत: गजट करा लीजिए, मार्कशीट बदल जाएगी। सही: गजट आगे के लिए है, मार्कशीट उस समय का रिकॉर्ड है।
- गलत: आधार दिखा दीजिए, काफ़ी है। सही: उसी ज़माने का सबूत चाहिए, आज का नहीं।
- गलत: ऑनलाइन आवेदन भर दिया तो काम चालू हो गया। सही: काम तब चलता है जब स्कूल आगे भेजे।
- गलत: स्कूल बंद हो गया तो कुछ नहीं हो सकता। सही: रास्ता लंबा है, पर DIOS के ज़रिए खुला है।
हम कहाँ सेवा देते हैं
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में। बोर्ड का काम हर जिले में एक जैसा चलता है, बस स्कूल और DIOS आपके अपने जिले के होते हैं:
| मध्य | लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, हरदोई, सीतापुर, रायबरेली, बाराबंकी |
| पश्चिम | नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, आगरा, अलीगढ़, मथुरा, मुरादाबाद, सहारनपुर |
| पूर्व | वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, आजमगढ़, जौनपुर, बलिया, देवरिया, गाज़ीपुर |
| बुंदेलखंड | झाँसी, बाँदा, महोबा, हमीरपुर, चित्रकूट, जालौन |
| रुहेलखंड | बरेली, शाहजहाँपुर, पीलीभीत, बदायूँ, रामपुर, बिजनौर, अमरोहा |
स्कूल और DIOS का काम आपको या घर के किसी सदस्य को करना होता है, क्योंकि वहाँ आपका जाना ज़रूरी है। बाकी कागज़ी तैयारी हम कर देते हैं। हमारा चैंबर Chamber No. 19, Sadar Tehsil, Sector 5, Gomti Nagar Vistar, Lucknow 226010 में है। फ़ोन 9540003316 या व्हाट्सएप 9540005002।
कुछ शब्द जो बार-बार मिलेंगे
- स्कॉलर रजिस्टर
- स्कूल का वह रजिस्टर जिसमें दाखिले के समय छात्र का नाम और ब्योरा दर्ज होता है। नाम सुधार में यही सबसे मज़बूत सबूत है।
- DIOS
- जिला विद्यालय निरीक्षक, जो जिले के विद्यालयों के ऊपर बैठते हैं। स्कूल आगे न भेजे तो शिकायत यहीं जाती है।
- नाम सुधार
- जब रिकॉर्ड में नाम वही होना था पर गलत दर्ज हो गया। इसमें गजट की ज़रूरत नहीं पड़ती।
- नाम परिवर्तन
- जब आप सचमुच नया नाम रख रहे हैं। इसमें गजट लगता है, पर पुरानी मार्कशीट पुराने नाम में ही रहती है।
- अनुक्रमांक
- परीक्षा का रोल नंबर, जिससे बोर्ड और स्कूल दोनों आपका रिकॉर्ड खोजते हैं।
- पावती
- आवेदन जमा करने की रसीद या हस्ताक्षर। आगे शिकायत करनी हो तो यही आधार बनती है।
इससे जुड़े पन्ने
आगे जो भी काम हो, उसके लिए यहाँ एक पन्ना है:
- नाम परिवर्तन की पूरी प्रक्रिया: हिंदी में, हर प्रारूप के साथ।
- गजट में नाम परिवर्तन: दो गजट हैं, और पास वाला हर जगह नहीं चलता।
- the same guide in English: यही जानकारी अंग्रेज़ी में।
- सुधार या गजट: कौन सा रास्ता आपका है।
- स्कूल आगे न भेजे तो: DIOS तक का रास्ता।
- कई साल बाद सुधार: पुराने मामलों के लिए।
- मार्कशीट और आधार में अलग नाम: सबसे आम टकराव।
- समाधान पोर्टल: कदम दर कदम।
- पिता के नाम में सुधार: वही रास्ता, अलग प्रविष्टि।
- चालीस सवालों के जवाब: असर के हिसाब से क्रम में।
- दफ़्तर से संपर्क: फ़ोन और व्हाट्सएप।
- आधार में नाम बदलना: मौके गिने-चुने हैं, और आधार गवाही नहीं है।
- पिता के नाम में सुधार: मार्कशीट पर उनका नाम भी गलत हो तो यही रास्ता है।
हम पहले यह क्यों पूछते हैं कि सबूत कौन सा है
मार्कशीट के मामले में हमारा पहला सवाल यह नहीं होता कि नाम क्या होना चाहिए। हम पूछते हैं कि उस समय का कोई कागज़ है या नहीं, क्योंकि उसी पर पूरा मामला टिकता है। जिनके पास सिर्फ़ आज का आधार होता है, उन्हें हम साफ़ बता देते हैं कि पहले पुराने कागज़ ढूँढिए, वरना स्कूल के चक्कर बेकार जाएँगे। और अगर कोई पहले ही गजट करा चुका है यह सोचकर कि मार्कशीट बदल जाएगी, तो वह भी हम सीधे बता देते हैं, भले सुनने में अच्छा न लगे। विपिन चौहान, बी.टेक एलएलबी, यही सवाल पहले पूछते हैं।
- पहले सबूत पूछते हैं, फिर नाम: क्योंकि मामला उसी पर टिकता है।
- सुधार और परिवर्तन अलग करते हैं: दोनों के रास्ते अलग हैं।
- लिखित आवेदन और तारीख़ें रखवाते हैं: ताकि आगे शिकायत का आधार बने।
- यह भी बताते हैं कि गजट यहाँ नहीं चलता: भले हमारा काम कम हो।
Associate office at Chamber No. 19, Sadar Tehsil, Sector 5, Gomti Nagar Vistar, Lucknow 226010, serving all 75 districts of Uttar Pradesh, Monday to Saturday, 10 AM to 6:30 PM. फ़ोन 9540003316 या व्हाट्सएप 9540005002।
मार्कशीट की फोटो भेज दीजिए
Uttar Pradesh Name Change
Associate Office: Chamber No. 19, Sadar Tehsil, Sector 5, Gomti Nagar Vistar, Lucknow, Uttar Pradesh 226010
Head Office: Metro Pillar 337, Hardev Nagar, Street 1, Shop No 1 (Shri Sham Documentation)
फ़ोन: 9540003316
व्हाट्सएप: 9540005002
ईमेल: info@uttarpradeshnamechange.com
समय: सोमवार से शनिवार, सुबह 10 से शाम 6:30 बजे
मार्कशीट की फोटो भेजिए और बता दीजिए कि उस ज़माने का और कौन सा कागज़ आपके पास है। इन्हीं दो से रास्ता तय होता है।
कॉल और नाम परिवर्तन प्रारूप पाइए
फ़ॉर्म खुल रहा है...
आम सवाल
क्या मैं सीधे बोर्ड को आवेदन कर सकता हूँ?
नहीं। बोर्ड के पास आपका रिकॉर्ड स्कूल ने भेजा था, इसलिए सुधार की सिफ़ारिश भी स्कूल से ही जाती है।
मैंने गजट करा लिया है, अब मार्कशीट बदल जाएगी?
नहीं। गजट आज से आगे के लिए है। मार्कशीट उस समय का रिकॉर्ड है, और बोर्ड यह पूछता है कि तब क्या सही था।
तो गजट बेकार गया?
नहीं, वह आधार, पैन, बैंक और पासपोर्ट में काम आएगा। बस मार्कशीट उसका हिस्सा नहीं है।
सबसे मज़बूत सबूत क्या है?
स्कूल का स्कॉलर रजिस्टर, क्योंकि वह दाखिले के समय भरा गया था और वहीं रखा है।
क्या आधार दिखाने से काम चलेगा?
अकेले नहीं। बोर्ड को उस ज़माने का सबूत चाहिए, आज बना कागज़ नहीं।
स्कूल आगे नहीं भेज रहा।
पहले लिखित आवेदन दीजिए और पावती लीजिए, उचित समय दीजिए, फिर DIOS के पास तारीख़ों के साथ शिकायत कीजिए।
शिकायत में क्या लिखूँ?
क्या रुका है और कब से। नाराज़गी नहीं, तारीख़ें, और अपना आवेदन तथा पावती साथ लगाइए।
मेरा स्कूल बंद हो चुका है।
यह असामान्य नहीं है। ऐसे मामलों में रास्ता DIOS के दफ़्तर से जाता है, और उसमें समय लगता है।
ऑनलाइन आवेदन भर दिया, अब क्या करूँ?
स्कूल जाइए। पोर्टल एक खिड़की है, दरवाज़ा नहीं, और फाइल तब चलती है जब स्कूल उसे आगे बढ़ाता है।
कितना समय लगता है?
महीनों, और यह काफ़ी हद तक इस पर निर्भर है कि स्कूल कितनी जल्दी आगे भेजता है।
पिता का नाम भी गलत है।
वह भी इसी रास्ते सुधरता है, बस प्रविष्टि अलग होती है। दोनों एक साथ बताना बेहतर रहता है।
सुधार के बाद क्या करूँ?
कई नकलें करा लीजिए और मूल संभालकर रखिए, क्योंकि यही कागज़ आगे हर जगह आधार बनता है।
आधिकारिक स्रोत
- उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद, अभिलेख सुधार से जुड़ी व्यवस्था के लिए।
- जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय, जो विद्यालयों के ऊपर का स्तर है।
- प्रकाशन विभाग, सिविल लाइन, दिल्ली 110054, केंद्रीय गजट के लिए।
- ई-गजट पोर्टल egazette.gov.in, प्रकाशित अधिसूचना खोजने के लिए।
यहाँ दी गई बातें इन स्रोतों और हमारे अपने काम से जाँची गई हैं। बोर्ड की प्रक्रिया, शुल्क और समय सीमाएँ बदलती रहती हैं, इसलिए आवेदन से पहले मौजूदा नियम पोर्टल पर या स्कूल से देख लीजिए।
संक्षेप में
दो बातें यहाँ सबसे ज़्यादा समय बर्बाद कराती हैं। पहली, लोग सीधे बोर्ड की वेबसाइट खोलकर बैठ जाते हैं, जबकि आवेदन आपके हाथ से नहीं, आपके स्कूल के ज़रिए जाता है। बोर्ड के पास जो रिकॉर्ड है वह स्कूल ने भेजा था, इसलिए उसे सुधारने की सिफ़ारिश भी वहीं से आती है, और जिसे आपको राज़ी करना है वह बोर्ड का अफ़सर नहीं, आपके पुराने स्कूल का लिपिक है। दूसरी, बहुत से लोग पहले गजट करा लेते हैं यह सोचकर कि मार्कशीट अपने आप बदल जाएगी। नहीं बदलती, क्योंकि बोर्ड यह नहीं पूछ रहा कि आपका नाम आज क्या है, वह यह पूछ रहा है कि परीक्षा के वर्ष में क्या था। उसका जवाब गजट में नहीं, उस ज़माने के कागज़ों में है। इसलिए पोर्टल खोलने से पहले एक दोपहर घर के पुराने कागज़ ढूँढने में लगाइए। सबूत घर में है, पोर्टल में नहीं।
